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क्या INDI Alliance को महंगा पड़ेगा जयंत चौधरी से पंगा ?

INDI vs NDA: पश्चिमी यूपी में किसकी नैय्या होगी पार ?

by Rashmi Singh

2024 के लोकसभा चुनाव में लगातार फेर बदल होते रहे और विपक्षी पार्टियों के इंडिया अलायन्स में जोड़ तोड़ का सिलसिला चला जिसमें बहुत से नेताओं ने इंडिया अलायन्स की ख़राब रणनीति और सीट बंटवारें में चल रहे confusion के तहत अलायन्स का साथ छोड़ दिया था. आपको बता दें कि यूपी में सात चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 19 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग होगी, जिसमें पश्चिमी यूपी की कई सीटें शामिल है। RLD प्रमुख जयंत चौधरी का साथ छूटने से इंडी एलायंस को बड़ा झटका लगा है और बात की जाए सत्ताधारी पक्ष की तो NDA पहले से और मजबूत स्थिति में आ गया है।

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बात की जाए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों की तो यहाँ बीजेपी की स्तिथि कुछ ठीक नहीं है. जिसके चलते सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने बयान में बिना जयंत चौधरी का नाम लिए बीजेपी गठबंधन पर जमकर हमला बोला है, और कहा कि पश्चिमी यूपी में भाजपा की घोषित संयुक्त रैली में उनके साथ गए दल भी अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं, और इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि भाजपा का गठबंधन ‘गांठबंधन’ बन चुका है, भाजपा पश्चिमी यूपी में हार मान चुकी है, साथ ही उन्होंने कहा कि 24 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की बोहनी ख़राब हो जाएगी क्योंकि यूपी में चुनाव पश्चिमी यूपी से ही शुरू हो रहा है।


लेकिन धरातल हकीकत कुछ और ही बयान करती है जी हाँ राष्ट्रीय लोकदल का पश्चिमी यूपी में खासा प्रभाव है। बीजेपी ने किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर न केवल किसानों के मन में बहुत हद तक अपनी जगह बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है, बल्कि राष्ट्रीय लोकदल को भी सपा गठबंधन से तोड़ लिया है। आरएलडी का पश्चिमी यूपी में जाट और मुस्लिम वोटरों पर अन्य किसी दल की तुलना में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

जिसका लाभ समय-समय पर राष्ट्रीय लोकदल और उसकी सहयोगी पार्टियों को मिलता रहा है। आरएलडी बीजेपी गठबंधन में शामिल होकर पश्चिमी यूपी की दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।वहीं पिछले लोकसभा चुनाव की तरह ही इस चुनाव में भी चुनावी रैलियों का आगाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी यूपी से शुरू किया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी कितना अहम है। बीजेपी यूपी में मिशन 80 के तहत अपनी तैयारियां कर रही है। वहीं बात करे इंडी एलाइंस की तो यह चुनावी रैलियों में भी सुस्त दिखाई दे रहा है। अभी तक चुनाव के मद्देनजर इंडी एलनस की पश्चिमी यूपी में एक भी संयुक्त रैली नहीं हुई है।


बीजेपी की पश्चिमी यूपी पर विशेष नजर है। आरएलडी के साथ आने से बीजेपी पश्चिमी यूपी में पहले चुनाव की तुलना में अब ज्यादा मजबूत हुई है और बीजेपी को भरोसा है की वह इस गठबंधन से मुसलमानो के वोट भी साध सकेंगे। लेकिन नतीजों पर इसका असर पड़ता है या नहीं, ये तो 4 जून को आने वाले नातीजे ही बताएंगे।

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