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सनातन धर्म ही नहीं बाइबिल व कुरान के अनुसार लिव इन रिलेशनशिप मान्य नहीं

by City Headline
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लखनऊ। संस्कृति पुनरुत्थान समिति व राष्ट्रधर्म प्रकाशन लिमिटेड के तत्वावधान में संस्कृति भवन राजेन्द्र नगर में ‘विवाह’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने समलैंगिक विवाह व लिव इन रिलेसनशिप पर चिंता जाहिर की।

इस मौके पर स्वामी मुरारी दास ने कहा कि सनातन धर्म के अलावा बाइबिल व कुरान के अनुसार भी समलैंगिक विवाह व लिव इन रिलेशनशिप मान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जब हम आधुनिकता में जीयेंगे तो कैसा विवाह। आज बाजारीकरण प्रदर्शन करवा रहा है। व्यक्ति व परिवार का कर्तव्य क्या है। इसे हम भूल रहे हैं। इसलिए बच्चे भी असंस्कारित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज कांत ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट को खत्म करने की आवश्यकता है। समलैंगिक विवाह केवल वासना तृप्ति के लिए किया जाता है तो उन्हें गोद लेने का अधिकार क्यों चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बात में न्यायपालिका को हस्तक्षेप भी नहीं करना चाहिए।

मनोज कांत ने कहा कि मुगलकाल में पारिवारिक व्यवस्था में शिथिलता आयी है। जहां से व्यक्ति समाज के लिए बनता था वह परिवार आज कम हो रहे हैं। उन्होंने कहा हिन्दू धर्म में विवाह एक संस्कार है। आध्यात्मिक उन्नति के लिए विवाह आवश्यक माना गया है। प्राचीनकाल में आठ प्रकार के विवाह प्रचलित थे। सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख ने कहा कि बाजारवाद समाज को तोड़ रहा है। इसके लिए समाज को जागरूक होना पड़ेगा। सामाजिक विषमता को दूर करना होगा। शिक्षा मूल्यपरक होनी चाहिए। राष्ट्रधर्म के प्रभारी निदेशक सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि समलैंगिक विवाह अप्राकृतिक है। यह अपसंस्कृति का आक्रमण है। इसके लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा जायेगा।

बाबूलाल शर्मा ने कहा कि इसके लिए समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। विवाह केवल स्त्री-पुरुष व पुरुष-स्त्री के बीच ही होता है। इसके लिए सरकार पर दबाव डालना चाहिए। लेखक डा. सौरभ मालवीय ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप समाज के लिए घातक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. हरमेश सिंह चौहान ने की।

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