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भगवान श्रीराम की भक्ति से ही विश्व का मंगल होगा : स्वामी गोविन्ददेव गिरि

17 जनवरी को जन्मभूमि परिसर में पधारेंगे रामलला : स्वामी गोविन्ददेव गिरि

by City Headline
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि महाराज ने मंगलवार को कहा कि भगवान श्रीराम की भक्ति से ही विश्व का मंगल होगा। उन्होंने कहा कि हमें तो देखकर एक तरफ आश्चर्य भी होता है, समाधान भी होता है और प्रसन्नता तो है भी कि लोगों में रामभक्ति का एक ज्वार उमड़ कर आया है। राम की भक्ति सदगुणों की आराधना है। राम समस्त सदगुणों के सगुण साकार विग्रह हैं। इसलिए उनको ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ कहा गया है, अर्थात राम धर्म का साक्षात श्रीविग्रह हैं।

स्वामी गोविंद गिरि ने कहा कि राम हमारे जीवन आदर्श हैं। हमें किस दिशा में अपने जीवन को ले जाना चाहिए, उसका आदर्श अयोध्या से सारे संसार को मिलता रहेगा और निश्चित रूप से जितनी रामभक्ति करेंगे, उतना व्यक्तिगत जीवन निखरेगा। उनका पारिवारिक कल्याण होगा और विश्व का मंगल होगा।
रामलला के अभिषेक के लिए देश की लगभग सभी नदियों से जल पहुंचा अयोध्या
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय पर मंगलवार को गोविन्द गिरि ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रामलला के अभिषेक के लिए देश की लगभग सभी नदियों से जल यहां आया है। मारीशस और थाईलैंड की अयोध्या के राजा राम हैं। वहां के राजा को राम कहते हैं। इस समय राजा राम 10 का शासन चल रहा है। थाईलैण्ड के राजा ने वहां के अयोध्या की मिट्टी भेजी है। राम की भक्ति पूरे विश्व में फैली देखकर आश्चर्य होता है। राम सबको प्रिय हैं। राम सबको इसलिए प्रिय हैं कि राम को सब प्रिय हैं।

उन्होंने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा की दृष्टि से जिस-जिस बात की अश्यकता थी,वह सारी तैयारियां पूर्ण हो गयी हैं। गर्भगृह तैयार है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी डा.अनिल मिश्रा मुख्य यजमान के रूप में आज संकल्प कर प्रायश्चित ग्रहण करेंगे। उपवास करेंगे व सरयू स्नान करेंगे। औषधियों के साथ उनका स्नान होगा।

प्रायश्चित का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत अपने शरीर को शुद्ध करना होता है। क्योंकि यदि किसी प्रकार का संसर्ग हमारे शरीर से हो गया है तो उसे यजमान घी, शहद,औषधि से स्नान कर शुद्ध करते हैं, ताकि कोई जन्तु हमारा पुनः स्पर्श न कर सकें। उसी प्रकार अनेक प्रकार की वृत्तियां हमारे पंचकोशों में निर्मााण होती है। इसलिए शुद्धि मन, बुद्धि व आत्मा के स्तर पर भी की जाती है।
17 जनवरी को जन्मभूमि परिसर में पधारेंगे रामलला
स्वामी गाोविन्द देव गिरि ने बताया कि रामलला 17 जनवरी को मंदिर परिसर में पदाधरेंगे। 18 जनवरी को रामलला का मंदिर से गर्भगृह में प्रवेश होगा और इधर यज्ञ मण्डप में यज्ञ का शुभारम्भ होगा। यज्ञ मण्डप में विशिष्ट प्रकार के मंत्रोंका जप होगा,यज्ञ में हवन होता रहेगा और विभिन्न प्रकार के देवताओं की स्थापना होगी।

उन्होंने बताया कि यज्ञ मण्डप में विविध प्रकार के हवनादिक क्रम चलेंगे। जहां पर रामलला का विग्रह होगा उनका भी अनेक द्रव्यों से स्नान कराया जायेगा,तााकि उस पाषाण के दोष निकल जांए, उसके तत्पश्चात अनेक प्रकार के मंत्रों के उच्चारण के साथ ठाकुर जी का जलाधिवास,अन्नावास, पुष्पाधिवास, फलाधिवास व शैय्यानिवास इत्यादि होंगे। इस प्रकार उस प्रतिमा को दैवीय तेज धारण करने के योग्य बनाया जायेगा।

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