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मप्रः सागर के मेहर गांव में दूषित पानी से बिगड़ी 70 से अधिक लोगों की तबीयत, एक की मौत

डॉक्टरों की टीम गांव पहुंची, पानी के सैंपल लिए, कलेक्टर ने किया गांव का दौरा

by Rashmi Singh

सागर, 5 जुलाई – जिले के मेहर गांव में दूषित पानी पीने से 70 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं। दूषित पानी के चलते हुई उल्टी-दस्त से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। गुरुवार को रातभर बीएमसी और जिला अस्पताल में बीमार ग्रामीणों के आने का सिलसिला जारी रहा। वहीं, जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में मरीजों को भर्ती किया गया है। इनमें करीब एक दर्जन से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव भेजी गई है। गुरुवार देर रात तक गांव में मरीजों का उपचार किया गया। पीएचई की टीम ने जांच के लिए पानी के सैंपल लिए हैं।
शुक्रवार को कलेक्टर दीपक आर्य भी मेहर गांव पहुंचे और उप-स्वास्थ्य केंद्र में बीमार ग्रामीणों का हालचाल जाना। उन्होंने दूषित पानी के ट्यूबवेल को सात दिन के लिए बंद करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि टीम बुला कर सर्वे कराया जा रहा है। बीमार बच्चों को तत्काल इलाज मुहैया कराया जा रहा है। गांव में दो एंबुलेंस भी बुलवा ली गई हैं।
जानकारी के अनुसार, सागर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर झांसी-सागर रोड पर नरयावली विधानसभा के मेहर में पंचायत के आदिवासी मुहाल नारायणपुरा में लगे बोर का पानी पीने से रविदास मंदिर के पास रहने वाली नेहा बंसल को बुधवार रात में उल्टियां हुई। पहले तो परिवार वालों ने बोर के पानी पर संदेह न करते हुए अन्य कारण माना और नेहा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद दूसरे दिन गुरुवार सुबह नेहा के घर के ही सात लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। देखते ही देखते गांवभर के लोग बीमार होने लगे। हालत यह हो गई कि स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद परिवार के लोग मरीजों को बांदरी अस्पताल लेकर पहुंचे। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। गुरुवार दोपहर तक उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों संख्या 70 तक पहुंच गई थी।
इधर, गुरुवार देर रात मेहर निवासी 40 वर्षीय लल्लन बंसल की बीएमसी में इलाज के दौरान मौत हो गई। सीएचएमओ डॉ. ममता तिमोरी शुक्रवार सुबह ही स्वास्थ्य टीम के साथ गांव पहुंची, जहां उन्होंने गांव भर के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए। घर-घर ओआरएस के घोल वितरित किए जा रहे हैं। लोगो को उबला पानी पीने की सलाह दी जा रही है। मेहर गांव में उल्टी-दस्त के शिकार हुए मरीजों में 3 से 8 साल तक के बच्चे और 60 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं। जिला अस्पताल में करीब 16 मरीजों को भर्ती कराया गया है। जिसमें 8 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा बीएमसी, भाग्योदय अस्पताल, बांदरी अस्पताल में मरीजों को भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि गांव में 70 से अधिक लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए हैं। सामान्य मरीजों को घर में रखकर ही इलाज दिया जा रहा है।
गांव की ज्योति बंसल ने बताया कि उसके परिवार की गेंदा बंसल 95 वर्ष, बीरेंद्र बंसल 35 वर्ष, मोहिनी बंसल 28 वर्ष, निकिता बंसल 22 वर्ष, अहन बंसल 6 वर्ष, उर्मी 9 वर्ष को उल्टी दस्त के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, नेहा बंसल (20 वर्ष) को गंभीर हालत में बीएमसी रेफर कर दिया गया है। अहन को पीआईसीयू में भर्ती कराया गया है। ज्योति ने बताया कि रविदास मंदिर के पास लगे सरकारी बोर का पानी पूरे गांव में सप्लाई होता है। वर्षों से गांव वाले इसी बोर का पानी पी रहे हैं। बारिश के चलते बोर के आसपास पानी भर गया है।
मेहर में बीमारी की सूचना मिलते ही नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने डॉक्टर्स की टीम को गांव भेजा और सभी पीड़ितों के समुचित इलाज के निर्देश दिए। सीएमएचओ डॉ. ममता तिमोरी ने बताया कि सूचना के बाद गांव में घर-घर ओआरएस का वितरण करवाया गया है। बोर के पानी का सेम्पल पीएचई भिजवा दिया गया है। रात में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। ग्रामीणों को उबला पानी पीने की सलाह दी गई है।
जिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉ. अजय यादव ने बताया कि बांदरी के पास मेहर गांव में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला है। उल्टी-दस्त की शिकायत पर 16 मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिसमें 8 बच्चे शामिल हैं। सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हालत स्थिर है। पानी और खानपान के कारण उल्टी-दस्त की शिकायत हो सकती है। मरीजों की सैंपलिंग की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही लोगों की तबीयत खराब होने का कारण सामने आ सकेगा।
वहीं, जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. अभिषेक ठाकुर ने बताया कि दूषित पानी पीने के कारण मरीजों को पेट में संक्रमण फैलने की आशंका है। सभी मरीजों की हालत स्थिर है और इनका इलाज किया जा रहा है। मरीजों की निगरानी के लिए अस्पताल में चार डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है।

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