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अयोध्या के नव्य सृजन में मोदी-योगी के विजन से विपक्ष बेचैन

by Madhurendra
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भव्य और दिव्य राम मंदिर में रामलला की 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के बाद आमजन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिये जाएंगे। भारत की धार्मिक-आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में अब यहां से ऐसा नया अध्याय शुरू हो रहा है, जो हर किसी को चमत्कृत और विपक्ष को बेचैन किये हुए है। धर्म धरा पर आकार लेते अयोध्या के इस नव्य सृजन के शिल्पी यकीनन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ हैं।

मोदी-योगी के विजन से सज-संवर रही अयोध्या, भगवान राम के त्रेतायुगीन अयोध्या धाम के वैभव का अहसास करा रही है। विभिन्न राम कथाओं में वर्णित अयोध्या नगरी के दिव्य-भव्य स्वरूप ने ही यह लिखने के लिए प्रेरित किया, ‘अवधपुरी ममपुरी सुहावनि…’। गोस्वामी तुलसी दास के रामचरित मानस ही नहीं अन्य भाषाओं में वर्णित राम कथाओं से रघुनंदन के माहात्म्य से ओत-प्रोत आमजन आज अयोध्या की ओर खिंचा चला रहा है।

ऐसे में, अयोध्या की आज की स्थिति का देश की राजनीति पर और व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पिछले दो लोकसभा चुनाव से केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से चुनावी मैदान में मात खा रहे दल प्रभावी सियासी हैसियत पाने के लिए जूझ रहे हैं। करीब चार महीने बाद होने जा रहे लोकसभा चुनाव में भी अभी ऐसी कोई सूरत बनती नहीं दिख रही है, जिसमें भाजपा के अजेय रथ को रोकने के करीब पहुंचते हुए विपक्षी दल दिख रहे हों।
मंदिर आंदोलन का पड़ा देश की राजनीति पर व्यापक प्रभाव
दरअसल, अयोध्या ने देश की राजनीति को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। अस्सी के दशक में संघ परिवार और भाजपा ने रामलला के मंदिर मसले पर सक्रिय पहल शुरू की। यह वह दौर था, जब हिन्दू वोटों की विशेष चिंता राजनीतिक दल नहीं करते थे। छह अप्रैल 1980 को कमल फूल निशान के साथ राजनीति में जनसंघ के बाद की पारी शुरू करने वाला भगवा खेमा अयोध्या को केंद्र में रखकर सक्रिय होने लगा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सन 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात्र दो सीटें मिली थीं, लेकिन इसी वर्ष से अयोध्या-दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में संघ, विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा आदि की सक्रियता मंदिर आंदोलन को केंद्र में रखकर तेज होने लगीं।
भाजपा ने कांग्रेस को सीधी टक्कर देकर समेटा
नतीजतन, सन 1989 में 85, 1991 में 120 तथा 1996 में 161 सीटें भाजपा ने प्राप्त कीं। भाजपा के प्रति बढ़ते जनसमर्थन के साथ भगवा खेमे का हौसला भी लगातार बढ़ता रहा। देश की सियासत में कांग्रेस को सीधी टक्कर दे रही भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के साथ अन्य दलों को मजबूत होते भगवा खेमे को रोकने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभा रही भाजपा ने अपने चुनाव घोषण पत्र में साफ कहना शुरू कर दिया था कि अयोध्या में भव्य मंदिर बनायेगी। इसको लेकर उसको कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के तीखे तंज तक सहने पड़े। भगवा खेमा आलोचनाओं से बेपरवाह हिन्दू वोटों की एकजुटता पर ध्यान केंद्रित करते हुए आगे बढ़ता रहा और कांग्रेस को लोकसभा में दहाई अंकों पर समेटने सफल रहा।
देश की राजनीति में अहम वर्ष साबित हुआ 2014
सन 2014 देश की राजनीति के लिहाज से अहम वर्ष साबित हुआ। वाजपेयी के नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता से बाहर कर कांग्रेस की अगुवाई में बनी 10 वर्ष पुरानी यूपीए सरकार को हटाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दृष्टि और सोच के साथ देश को आगे बढ़ने का अहसास कराया। केंद्रीय सत्ता में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के समय में ही हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक 312 (सहयोगियों के साथ 325 सीट) सीटें जीतकर सरकार बनाई। यूपी की कमान मिली गोरक्षपीठ के योगी आदित्य नाथ को। गोरखपुर का सांसद रहते हुए राजनीति में विशेष छवि के साथ सक्रिय योगी आदित्य नाथ ने यूपी में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार का नेतृत्व संभालते ही अयोध्या सहित प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों के गौरव को स्थापित करने के गंभीर प्रयास शुरू किये। अयोध्या में दीपावली से एक दिन पहले दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन शुरू करने वाले योगी लगातार राम नगरी के विशेष विकास के लिए सक्रिय दिखे।
मोदी-योगी की दृष्टि से संवरती अयोध्या
सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम जन्मभूमि में विराजमान रामलला के पक्ष में आने के साथ अयोध्या में विकास की नई इबारत लिखे जाने की आहट मिलने लगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के साथ रामलला के दिव्य-भव्य मंदिर में निर्माण की राह प्रशस्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या को अलौलिक स्वरूप देने में और तेजी से सक्रिय हो गए। इसमें महती भूमिका बतौर यूपी सीएम योगी ने निभाई। योगी अयोध्या में विकास कार्यों की सीधी माॅनीटरिंग कर रहे हैं। वे यहां लगातार मौके पर पहुंच कर भव्यतम रूप देने के अभियान पर दृष्टि बनाये हुए हैं।
दस वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये के नये प्रोजेक्ट आएंगे अयोध्या में
सन 2019 में 303 लोकसभा सीटों के साथ देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ रही मोदी सरकार अयोध्या के गौरव को पुनर्स्‍थापित करने के अपने अभियान में अब तेजी के साथ सक्रिय हुई। इसमें सन 2022 में पुनः यूपी के सीएम बने योगी का भरपूर साथ मोदी सरकार को मिला। आज अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, विशिष्ट सुविधाओं से युक्त अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, राम नगरी तक पहुंचने वाले सभी दिशाओं के मार्गों का नवीनीकरण, चौड़ीकरण आदि के साथ नव्य अयोध्या का चकाचौंध करता स्वरूप सभी को लुभा रहा है। भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी के केंद्र बिंदु के रूप में स्थापित हो रही अयोध्या को जिन्होंने पांच वर्ष पूर्व देखा था, वे यहां का दिव्य-भव्य स्वरूप देखकर स्वप्न लोक जैसी अनुभूति पा रहे हैं। मोदी और योगी सरकार भी राम नगरी की भयव्ता को दिव्यता के चरम तक पहुंचाने के भगीरथ प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ कहते हैं, ‘अगले 10 वर्ष के अंदर अकेले श्री अयोध्या धाम के लिए एक लाख करोड़ रुपये के नये प्रोजेक्ट आ रहे हैं।’

जाहिर है, अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आमंत्रण ठुकरा चुके भाजपा विरोधी दल बेहद बेचैन हैं। अयोध्या और प्रभु राम के प्रति आमजन की अगाध आस्था का यह प्रकटीकरण उन्हें खुद को सबसे बड़ा हिन्दू कहने की होड़ में उलझाये हुए है। ऊल-जलूल बयानबाजी तक पहुंच चुके विपक्षी दल सुंदर कांड का पाठ और विभिन्न मंदिरों में देव दर्शन कर हिन्दू और हिदुत्व की दुहाई दे रहे हैं। फिलहाल, अयोध्या में राम पथ से दिल्ली के सत्ता पथ की तरफ तीसरी बार बढ़ते दिख रहे प्रधानमंत्री मोदी और भगवा खेमा रामधुन संग अगले लोकसभा चुनाव के माहौल को सराबोर करने में सक्रिय है।

 

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