भारतीय शेयर बाजार में आज सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी नेशनल एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) के शेयरों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली. कंपनी का शेयर 5.61% की दमदार बढ़त के साथ 406.15 रुपये के स्तर पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान निवेशकों का उत्साह इस कदर रहा कि शेयर ने 407.90 रुपये का अपना 52-सप्ताह का नया उच्चतम स्तर भी छू लिया, जबकि दिन का निचला स्तर 383.95 रुपये रहा. इस तेजी के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण अब 74,594.80 करोड़ रुपये के विशाल स्तर पर पहुंच गया है. बाजार के विश्लेषक मानते हैं कि 12.20 का पी/ई अनुपात और 2.59% का लाभांश प्रतिफल (Dividend Yield) इसे निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प बनाता है.
मीडिया रिपोर्ट्स पर कंपनी का स्पष्टीकरण
बाजार में आई इस तेजी के बीच नाल्को ने मीडिया में चल रही उन खबरों पर स्थिति स्पष्ट की है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि कंपनी बैटरी स्टोरेज के साथ 200-300 मेगावाट की ग्रीन पावर क्षमता स्थापित करने की योजना बना रही है. शेयर बाजारों (BSE और NSE) को दी गई जानकारी में कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल ऐसे किसी प्रोजेक्ट के लिए कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही कोई अंतिम निर्णय लिया गया है.
हालांकि, कंपनी ने यह स्वीकार किया है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया में है. यह कदम कंपनी के ‘नेट-जीरो’ और हरित ऊर्जा के विजन का हिस्सा है. शेयर की कीमतों में आए उछाल पर प्रबंधन ने कहा कि नॉन-फेरस मेटल सेक्टर में हाल ही में सामान्य तेजी देखी गई है और नाल्को का शेयर भी उसी रुझान का पालन कर रहा है. कंपनी के पास ऐसी कोई गोपनीय जानकारी नहीं है जिसे साझा न किया गया हो.
एल्यूमिनियम उद्योग में ‘नवरत्न’ का दबदबा
7 जनवरी 1981 को स्थापित और ‘नवरत्न’ का दर्जा प्राप्त नाल्को भारत के एल्यूमिनियम उद्योग की रीढ़ मानी जाती है. खान मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाली इस कंपनी में भारत सरकार की 51.28% हिस्सेदारी है. भुवनेश्वर, ओडिशा में मुख्यालय वाली नाल्को की सबसे बड़ी खासियत इसकी एकीकृत कार्यप्रणाली है. यह दुनिया में बॉक्साइट और मेटलर्जिकल ग्रेड एल्यूमिना के सबसे कम लागत वाले उत्पादकों में से एक है. कंपनी केवल धातु निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ओडिशा में अपनी बॉक्साइट खदानों, एल्यूमिना रिफाइनरी, एल्यूमिनियम स्मेल्टर और यहां तक कि अपने स्वयं के बिजली संयंत्रों का भी संचालन करती है.
मजबूत बुनियादी ढांचा और वित्तीय प्रदर्शन
नाल्को की वित्तीय स्थिति इसके मजबूत बुनियादी ढांचे का प्रमाण है. कंपनी की कुल आय 14,170 करोड़ रुपये (लगभग 1.7 बिलियन डॉलर) और शुद्ध लाभ 2,955.95 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जो इसकी परिचालन क्षमता को दर्शाता है. कंपनी की कुल संपत्ति 14,549.62 करोड़ रुपये है. लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने के लिए नाल्को के पास अपनी रेल और बंदरगाह सुविधाएं भी मौजूद हैं, जो इसके कारोबार को और अधिक किफायती बनाती हैं.
निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा है. वर्ष 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी की बिक्री कारोबार का लगभग 42% हिस्सा निर्यात आय से आया था. इसके अलावा, कंपनी अनुसंधान और विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है; इसके अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र को भारत सरकार के DSIR विभाग से मान्यता प्राप्त है, जहां अब बाहरी नमूनों का परीक्षण भी किया जा रहा है. श्री धर पात्रा के नेतृत्व में नाल्को लगातार अपनी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार कर रही है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि में इसका योगदान महत्वपूर्ण बना हुआ है.



