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भारतीयों के हुनर की ताकत को अमेरिका ने स्वीकारा

अमेरिकी सांसद बोले 'ऐसे भारतीय प्रोफेशनल्स की दरकार'

by Sanjeev

वकाशिंग्टन। अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की भारी डिमांड है। अमेरिका में बसे भारतीयों का स्टेटस और उनकी पोजिशन यह बताने के लिए काफी है कि भारत से अमेरिका कितना प्रभावित है। अब तो अमेरिका के जनप्रतिनिधि भी भारत का लोहा मानने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती धाक की गूंज अब अमेरिका में भी सुनाई दे रही है। यही कारण है कि अमेरिका में पेन्सिल्वेनिया के 8वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से सांसद मैट कार्टराइट ने कहा कि अमेरिका को भारतीय प्रोफेशनलों की सख्त आवश्यकता है। इसी वजह से कार्टराइट ने ग्रीन कार्ड जारी करने की 7 प्रतिशत के कोटा को हटाने की मांग भी की है।
वैसे तो अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। यही कारण है कि अमेरिका को और भारतवंशियों की आवश्यकता है जो वहां रहकर अमेरिका के विकास में और योगदान कर सकें। अमेरिकी सांसद मैट कार्टराइट ने भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड की कैप को खत्म करने की अपील भी की है।
7 फीसदी ग्रीनकार्ड के कोटे को हटाने की मांग
अमेरिका हर साल सिर्फ 7% भारतीयों को ही ग्रीन कार्ड जारी करता है। कार्टराइट ने इस कोटे को हटाने की मांग की है। कार्टराइट ने कहा कि ये बहुत जरूरी है कि जब भारतीय नौकरी की तलाश में हों तो वो अमेरिका आकर बसें, क्योंकि अमेरिका को हाई क्वालिटी, हाई स्किल्ड और स्मार्ट लोगों की जरूरत है। मैट कार्टराइट पेन्सिल्वेनिया के 8वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से सांसद हैं। कार्टराइट लंबे समय से ग्रीन कार्ड का कोटा हटाने की गुहार लगाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हर देश के लिए 7 फीसदी कोटा सीमित कर दिया है, लेकिन इस वजह से भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक और मित्र देशों को नुकसान होता है। भारत में बहुत सारे लोग उच्च शिक्षित हैं और अमेरिका में 7 फीसदी कोटे की सीमितता की वजह से इन्हें मौका नहीं मिल पाता है। यदि ऐसे लोगों को अमेरिका में मौका नहीं मिला, तो यह अमेरिका की बेवकूफी होगी।
अमेरिका में हाई स्किल्ड भारतीयों की जरूरत
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमेशा तेज बुद्धि और हाई स्किल्ड लोगों को यहां आने और हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वागत किया है। और ऐसा सैकड़ों साल से जारी है। इसलिए ये 7 प्रतिशत का मनमाना कोटा लगाना गलती है। कार्टराइट ने कहा कि दोनों देशों के बीच होने वाला अंतर्राष्ट्रीय कारोबार बहुत जरूरी है। और भारत से ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आएं, ये भी बहुत जरूरी है।
ग्रीन कार्ड को अमेरिका में आधिकारिक तौर पर स्थायी निवास कार्ड के तौर पर जाना जाता है। यह अमेरिका में प्रवासियों को जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, जिसके तहत वीजाधारक को स्थायी रूप से रहने का अधिकार दिया जाता है। ग्रीन कार्ड जारी करने के लिए प्रति देश के हिसाब से एक तय सीमा होती है। अनुमान है कि अमेरिका में 2.35 करोड़ लोग एशियाई मूल के हैं। सबसे ज्यादा 52 लाख नागरिक चीनी मूल के हैं। दूसरे नंबर पर 48 लाख भारतीय मूल के हैं।

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