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दारुल उलूम ने गजवा-ए-हिन्द के समर्थन में फतवा जारी किया

जिलाधिकारी सहारनपुर ने उच्चाधिकारियों को तत्काल जाँच कर प्रभावी कार्यवाही के आदेश दिये

by Madhurendra
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सहारनपुर। इस्लामिक शिक्षा के केंद्र दारुल उलूम देवबंद ने गजवा-ए-हिन्द को मान्यता देने वाला फतवा जारी किया है। दारूल उलूम देवबंद ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से ये फतवा जारी किया है। इसमें गजवा-ए-हिन्द को इस्लामिक दृष्टिकोण से वैध बताते हुए महिमामंडित किया गया है। इसमें कहा गया है कि गजवा-ए-हिंद में मरने वाले महान बलिदानी होंगे, जिस पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सहारनपुर के जिलाधिकारी व एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।

मुख्तार कंपनी द्वारा प्रकाशित सुन्न अल नसा नाम की किताब का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस किताब में गजवा-ए-हिन्द को लेकर एक पूरा चैप्टर है। जिसमें बताया हजरत अबू हुरैराह ने हदीथ के बारे में बताते हुए कहा है कि अल्लाह के मैसेंजर ने ‘भारत पर हमला’ करने का वादा किया था। अगर मैं जिंदा रहा तो इसके लिए मैं खुद और अपनी धन सम्पदा को कुर्बान कर दूंगा। मैं सबसे महान बलिदानी बनूंगा। इसमें इस बात का भी जिक्र किया गया है कि देवबंद की मुख्तार कंपनी ने इस किताब को प्रिंट किया है। जिस पर एनसीपीसीआर ने इस मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए सहारनपुर के डीएम और एसपी को कार्रवाई के लिए लिखा है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सहारनपुर जिले के डीएम और एसपी को एक नोटिस जारी कर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को कहा है। एनसीपीआर ने कहा है कि दारुल उलूम देवबंद मदरसे में बच्चों को भारत विरोधी शिक्षाएं दे रहा है। इससे इस्लामिक कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है। आयोग ने इसे किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 का उल्लंघन करार दिया है। एनसीपीसीआर ने सीपीसीआर अधिनियम की धारा 13 (1) टीजे) के तहत मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस तरह के फतवे की सामग्री से देश के खिलाफ नफरत फैल सकती है।

आयोग ने जिला प्रशासन से दारुल उलूम की बेवसाइट की जांच करने का अनुरोध करते हुए कहा है कि इसके जरिए देश की जनता को गुमराह किया गया है। इसलिए इस वेबसाइट की जांच कर इसे तुरंत ब्लॉक किया जाए। इसके साथ ही एनसीपीसीआर ने चेताया है कि जल्द ही इसको लेकर कोई एक्शन नहीं लिया गया तो खुद जिला प्रशासन भी समान रूप से इसके लिए जिम्मेदार होगा। दारुल उलूम देवबंद में बच्चों को ये पढ़ाया जा रहा है कि किस तरह से ‘गजवा ए हिन्द’ किया जाए। जो भी गजवा-ए-हिन्द के लिए अपनी जान देगा वो सर्वोच्च बलिदानी कहा जाएगा। ये संस्था पूरे दक्षिण एशिया में मदरसों को संचालित करती है। इस तरह से बच्चों को भारत पर हमले के लिए उकसाना बहुत ही खतरनाक है। इस मामले में हमने जिला प्रशासन से देशद्रोह की धाराओं के तहत केस दर्ज करने को कहा है।

जिलाधिकारी दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि एनसीपीसीआर से निर्देश प्राप्त हुए हैं और उन्होंने उस निर्देश मिलने के बाद वारिस स्कूल के शिक्षक को इस बारे में पत्र भेज दिया है। देवबंद के सीओ व एसडीएम को इस संबंध में निर्देशित कर तुरंत कार्रवाई के आदेश कर दिए गए हैं।

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