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आठ साल बाद मिला बुढ़ाना के विनोद के परिवार को न्याय , हत्यारे को मिली उम्र कैद की सजा

by Sanjeev
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मुजफ्फरनगर। जिले के बुढ़ाना थाने के तहत करीब आठ साल पहले हुए क़त्ल के मामले में अपर अवं सत्र जिला न्यायलय ने अभियुक्त संदीप को आजीवन कारावास और बीस हज़ार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है । दफा 25 के तहत संदीप पर ही दर्ज़ एक अन्य मुक़दमे में भी कोर्ट ने दो साल का कठोर कारावास और पांच हज़ार रूपये का अर्थ दंड लगाया।
मामला प्रेम प्रसंग का है। मुक़दमे में दिए तथ्यों के अनुसार युवक विनोद पुत्र भारत सिंह कश्यप का विवाह गाँव की एक युवती से तय हुआ था। दर्ज़ प्राथमिकी के अनुसार विनोद का जिस युवती से विवाह तय हुआ था उसको जिला बागपत के थाना बड़ौत निवासी युवक संदीप पुत्र रामेशं चंद्र भी पसंद करता था और विवाह करना चाहता था। जब संदीप को पता चला की उस युवती की शादी विनोद से तय हो गयी है तो वह आग बबूला हो गया। उसने कई बार विनोद को रिश्ता तोड़ने के लिए दबाव बनाया। लेकिन विनोद इसके लिए तैयार नहीं हुआ और अपनी शादी की तैयारी करता रहा। संदीप ने विनोद को कई बार धमकाया भी कि अगर उसने रिश्ता नहीं तोडा तो इसका अंजाम बहुत भयानक होगा।
प्राथमिकी के अनुसार 10 मार्च 2015 को विनोद अपने सगे भाई कर्मवीर और चचेरे भाई राजवीर के साथ विवाह से सम्बंधित खरीदारी के लिए बुढ़ाना बाजरा आया था। खरीदारी पूरी करने के बाद तीनों लोग घर जाने के लिए रामछैल तिराहे पर साधन की तलाश में खड़े थे। इसी बीच संदीप वहां आया और विनोद को बात करने के लिए किनारे बुलाया। संदीप ने विनोद को फिर समझाया कि अभी भी वक़्त है वह यह रिश्ता तोड़ दे। वह उसकी मंगेतर से बहुत प्यार करता है और किसी भी सूरत में उसकी शादी अपने अलावा किसी और से नहीं होने देगा। लेकिन विनोद उसकी धमकी से नहीं डरा और उसने रिश्ता तोड़ने से इंकार कर दिया। इससे गुस्साए संदीप ने विनोद के सीने में बिलकुल पास से गोली मार दी। गोली चलते ही बाजार में भगदड़ मच गयी। संदीप मौके का फायदा उठाते हुए वहां से भाग निकला और कुछ दूर पर पहले से स्टार्ट खड़ी मोटर साइकिल पर बैठकर फरार हो गया।
वारदात जानकारी मिलते ही थाने कि पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गयी और विनोद को तत्काल जीप में लेकर समीप के अस्पताल ले गए । लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने विनोद को मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम में विनोद की मौत का कारण बुलेट इंजरी और अत्यधिक रक्तस्राव बताया। दूसरी तरफ पुलिस ने तकाल एक्शन लेते हुए कई जगह छपे मारे और अंततः संदीप को गिरफ्तार कर लिया।
करीब आठ साल की कानूनी लड़ाई के बाद अंततः विनोद का परिवार को अदालत से न्याय पाने में कामयाब रहा। संदीप की तरफ से अपने मासूम साबित करने के सारे प्रयास विफल रहे। अपर एवं सत्र जिला न्यायलय की पीठासीन अधिकारी सीमा महरोत्रा ने संदीप को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ बीस हज़ार का जुरमाना लगाया। साथ आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी मानते हुए दो साल का कठोर कारावास की सजा और पांच हज़ार का अर्थ दंड लगाया।

 

 

 

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