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बुन्देलखंड के लिए खुशखबरीः महोबा के देशी पान को मिला जीआई टैग

पैदावार बढ़ाने के के लिए अब इसकी खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी

by Sanjeev

हमीरपुर । बुन्देलखंड के वीरभूमि महोबा में पिछले कई दशकों से देशी पान की खेती कर रहे किसानों के लिए राहत देने वाली खबर है। अब यहां के देशी पान को जीआई टैग मिल गया है। जिससे पान की खेती से जुड़े किसानों में बड़ी खुशी देखी जा रही है। बुन्देलखंड के देशी पान की देश के कोने-कोने में बड़ी डिमांड है। अब डिपार्टमेंट ने इसकी खेती का रकबा बढ़ाने की तैयारी की है।
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का यह जनपद पान की खेती के लिए देश विदेश में प्रसिद्ध रहा है। 1990 के दशक में यहां पर 500 एकड़ से ज्यादा जमीन पर पान की खेती की जाती थी। धीरे-धीरे बदहाली का शिकार हुए पान किसानों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। वर्तमान समय में पान की खेती का रकबा लगभग 50 एकड़ तक सिमट कर रह गया है। तत्कालीन जिलाधिकारी डॉक्टर काजल ने 2014 में पान के उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जीआई टैग की पहल शुरू की तो 2021 में तत्कालीन जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने पहल को आगे बढ़ाया और यहां के देसावरी पान को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जीआई टैग दिया गया है। जी आई टैग मिलने के बाद पान किसानों को नई पहचान मिली है।
जीआई टैग मिलने के बाद पान की खेती को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ा गया है ऐसे में अगर पान की फसल को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होता है तो किसानों को इस योजना के तहत आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा। जिससे किसान एक बार फिर पान खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पान किसान जीवन लाल चौरसिया ने बताया कि पान की खेती के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अच्छे पान की खेती के लिए नमी की आवश्यकता होती है। पान के बेल की वृद्धि बारिश के मौसम में सर्वाधिक होती है। शरद चौरसिया ने बताया कि पान में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं। पान को खाने के साथ-साथ पूजा पाठ में भी उपयोग किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्र में पान की खेती अलग-अलग तरीके से की जाती है।
बुन्देलखंड के देशी पान की खेती को मिलेगा बढ़ावा
जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि जनपद महोबा के पान को जीआई टैग मिला है जिससे यहां के पान किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ भी मिल सकेगा। पान की पौध के लिए अधिकतम 30 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री तक तापमान की आवश्यकता होती है। इससे कम या ज्यादा मौसम ठंडा या गर्म होने पर पान की खेती को नुकसान होने का खतरा रहता है। पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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