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सर्वाधिक शक्ति पीठ भारत के बाहर बांग्लादेश में

बांग्लादेश स्थित सभी शक्ति पीठों का शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने दर्शन-पूजन किया 

by Madhurendra
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ढाका। आदि शक्ति माता दुर्गा के भारत सहित विभिन्न पड़ोसी देशों में कुल 52 शक्ति पीठ हैं। हालांकि देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है लेकिन तन्त्र चूड़ामणि में 52 शक्ति पीठ बताए गए हैं। इनमें 42 शक्ति पीठ भारत में और पांच पड़ोसी देशों में 10 शक्ति पीठ हैं, जिनमें सर्वाधिक पांच शक्ति पीठ बांग्लादेश में बताए जाते हैं।
सुगंधा शक्ति पीठ
सुगंधा शक्ति पीठ बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर है। यह शक्ति पीठ शिकारपुर नगर पालिका क्षेत्र में सुगंधा नदी के किनारे स्थित है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यहां माता की नासिका गिरी थी। इसीलिए इसे नासिका पीठ भी कहा जाता है। इस देवी की शक्ति सुनंदा है और इनके भैरव को त्र्यंबक कहा जाता है। यह मंदिर उग्रतारा के नाम से भी विख्यात है। यह पत्थर का बना हुआ बहुत ही प्राचीन मंदिर है। उग्रतारा सुगंधा देवी के पास तलवार, खेकड़ा, नीलपाद, और नरमुंड की माला है। कार्तिक, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गणेश उनके ऊपर स्थापित हैं।
यशोरेश्वरी शक्ति पीठ
यशोरेश्वरी शक्ति पीठ बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 350 किलोमीटर दूर है। यह शक्ति पीठ खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर स्थान पर स्थित है। मान्यता है कि यहां माता सती की हथेलियां गिरी थीं। माता की शक्ति को यशोरेश्वरी और भैरव को चण्ड कहते हैं। बताया जाता है कि कभी यह मंदिर बहुत भव्य हुआ करता था। यहां 100 से अधिक दरवाजे थे, लेकिन मुगलों ने इसे खंडित कर दिया। इसके बाद लक्ष्मण सेन और प्रपाद आदित्य ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। इसके बाद स्थानीय हिंदू और मुस्लिम मिलकर इस मंदिर की रक्षा करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी यहां पूजा-अर्चना करने आए थे।
श्री शैल महालक्ष्मी शक्ति पीठ
श्री शैल महालक्ष्मी शक्ति पीठ बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 260 किलोमीटर दूर है। यह शक्ति पीठ सिलहट जिले जैनपुर गांव में स्थित है। मान्यता है कि यहां माता सती का गला (ग्रीवा) गिरा था। इस देवी की शक्ति है महालक्ष्मी और भैरव को शम्बरानंद कहते हैं।
अपर्णा शक्ति पीठ
अपर्णा शक्ति पीठ बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 176 किलोमीटर दूर है। यह शक्ति पीठ बागुरा जिले के भवानीपुर गांव में स्थित है। मान्यता है कि करतोया तट के पास स्थित इस स्थल पर माता की पायल गिरी थी। इसकी शक्ति है अर्पण और भैरव को वामन कहते हैं। अपर्णा का अर्थ है, जो भगवान शिव को अर्पित है। यहां प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा, रामनवमी और दशहरे के अवसर पर विशाल मेला लगता है।
चट्टल भवानी शक्ति पीठ
चट्टल भवानी शक्ति पीठ बांग्लादेश में चिट्टागौंग जिले के सीताकुंड में चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर स्थित है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर माता सती की दायीं भुजा गिरी थी। यहां देवी माता की शक्ति भवानी हैं और भैरव को चंद्रशेखर कहा जाता है। यह शक्ति पीठ ढाका से लगभग 210 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
अन्य देशों के शक्ति पीठ
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार बांग्लादेश के अलावा भारत के बाहर नेपाल में दो शक्ति पीठ हैं तथा श्रीलंका, पाकिस्तान और तिब्बत में एक-एक शक्ति पीठ है। इनमें नेपाल के गंडक नदी पर गंडकी शक्ति पीठ है। इस स्थान पर माता सती का दांया गाल गिरा था। इसके अलावा नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के पास गुहेश्वरी शक्ति पीठ है, जहां माता के दोनों घुटने गिरे थे। श्रीलंका में इंद्राक्षी शक्ति पीठ है, जहां देवी सती की पायल गिरी थी। तिब्बत में मानसरोवर नदी के तट पर मानस शक्तिपीठ स्थित है। इस जगह पर देवी सती की दायीं हथेली गिरी थी। वहीं पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगलाज शक्ति पीठ है। यहां देवी सती का सिर गिरा था।

दुर्गा सप्तशती व अन्य पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब माता सती ने अपना प्राण हवन कुंड में त्याग दिया था तब भगवान शिव सती के शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे थे। भगवान शिव को ऐसा करने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने चक्र चलाकर देवी सती के कई टुकड़े कर दिए थे। इसके बाद माता सती के अंग और आभूषण जिन स्थानों गिरे वहां-वहां शक्ति पीठ का उदय हुआ।

गोर्वधन पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ महाराज बांग्लादेश की आठ दिवसीय यात्रा पर थे। इस दौरान यहां स्थित सभी शक्ति पीठों एवं अन्य प्रमुख देवालयों का दर्शन व पूजन सम्पन्न कर आज वह भारत के लिए रवाना हो गए।

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