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पायलट ने सीएम पर बोला हमला, ‘लगता है गहलोत की नेता सोनिया गांधी नहीं वसुंधरा राजे हैं’

by Madhurendra
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जयपुर। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। पायलट ने मंगलवार को सीएम गहलोत पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के दो दिन पूर्व धौलपुर में दिए गए भाषण से ऐसा लगा कि अशोक गहलोत की नेता सोनिया गांधी नहीं है बल्कि उनकी नेता वसुंधरा राजे सिंधिया हैं। इस भाषण से मुझे समझ में आ गया कि मेरे धरने के बावजूद वसुंधरा राजे के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने ऐलान किया कि वे 11 मई से राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर कार्यालय से जयपुर तक 125 किलोमीटर जन संघर्ष पदयात्रा निकालेंगे। पांच दिन की यह यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए होगी। पायलट मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

पत्रकार वार्ता में पूरी तरह से बगावती मूड में दिखे सचिन ने कहा कि एक तरफ यह कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार को गिराने का काम भाजपा कर रही है तो दूसरी तरफ यह कहा गया कि सरकार को बचाने का काम वसुंधरा राजे कर रही थीं। मुख्यमंत्री कहना क्या चाहते हैं, स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि पहली बार देख रहा हूं कि कोई अपनी ही पार्टी के सांसदों- विधायकों की आलोचना कर रहा है, यह पूरी तरह गलत है।

पायलट ने कहा कि वसुंधरा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार पर मैंने कई चिट्ठियां लिखी, अनशन पर बैठा, लेकिन जांच नहीं हुई। समझ में आ गया है कि एक्शन क्यों नहीं लिया गया। अब मैं नाउम्मीद हूं। मैं जनता के बीच जाऊंगा। जनता के सामने सभी को नतमस्तक होना होता है। पायलट ने कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे, जनता के बीच में जाएंगे उनके मुद्दे उठाएंगे।

पायलट ने कहा कि पिछले ढाई साल में मुझे कोरोना, निकम्मा, नाकारा-गद्दार तक कहा गया। मैं यह सब सुन रहा था। हम चुप थे, क्योंकि हम पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते थे। मैं दिल्ली गया, अपनी बात रखी और सारे तथ्यों को देखते हुए तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 25 सितंबर, 2022 को विधायकों से बात करने के लिए तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को जयपुर भेजा था लेकिन विधायकों की बैठक हो नहीं पाई। सोनिया गांधी के आदेशों की अवहेलना हुई, उनकी मानहानि हुई, बेइज्जती हुई, वह गद्दारी थी। उन्होंने कहा कि इतने सारे विधायकों को उनकी इच्छा के खिलाफ इस्तीफा दिलाया गया, अपनी सरकार को ही संकट में खड़ा किया गया। यह अनुशासनहीनता है। बहुत से लोग कहते हैं कि मोदी और शाह के कहने पर इस्तीफे दिलाए गए, अब अगर यह बात कोई मुझे कहे और मैं मंच पर जाकर बोलूं तो क्या शोभा देता है। अब तक जो हुआ वह दिखाता है कि अनुशासनहीनता किसने की। पार्टी का अनुशासन किसने तोड़ा और सही मायने में संगठन और सरकार को कौन मजबूत और कौन कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में 40-45 साल से काम कर रहे हेमाराम चौधरी और बृजेन्द्र ओला समेत अनेक विधायकों पर आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे विधायकों पर इल्जाम लगाना गलत है।

पायलट ने कहा कि मेरे खिलाफ राजद्रोह-देशद्रोह का केस दर्ज कराने का प्रयास किया गया। हम और हमारे साथी नेतृत्व परिवर्तन चाहते थे। मैं दिल्ली गया अपनी बात रखी। हमारी बात सुनकर तब वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कमेटी का गठन किया। हमने विधानसभा उपचुनाव और राज्यसभा चुनावों में मिलकर पार्टी को जिताया। यदि हमने सरकार के खिलाफ साजिश रची और उनके (गहलोत के) पास इसके सबूत हैं तो उनको सार्वजनिक करना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। असंतुष्ट विधायकों से गृहमंत्री अमित शाह से लिये पैसे वापस करने की सीएम की अपील पर उन्होंने कहा कि जिनका पूरा कार्यकाल पैसों के दम पर चलता हो, उन्हें हर जगह पैसा ही दिखता है। इस तरह से आरोपों से किसी का भला नहीं हो सकता है।

पायलट ने कहा कि अपने नेताओं को खुश करने के लिए बहुत सारे लोग बहुत सारी बातें करते हैं, चुगली करते हैं। ऐसी बातें मुझसे भी की जाती हैं लेकिन मैं मंच पर ये कहूं तो यह शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले तथ्यों को जान लेना चाहिए। मैं सीएम के आरोपों को सिरे से नकार रहा हूं। जो कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करेगा, हम उसका विरोध करेंगे।

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