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नवरात्र: मां शैलपुत्री की आराधना को मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

भारतीय नव संवत्सर 2080 का ब्रह्म व शुक्ल योग में हुआ आरंभ

by Madhurendra
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जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर बुधवार को ब्रह्म योग व शुक्ल योग में भारतीय नव संवत्सर 2080 का आगाज हुआ। तीन साल बाद बुधवार को नव संवत्सर की शुरुआत हुई। नव संवत्सर के साथ ही सौर मंडल के मंत्रीमंडल में बदलाव भी हुआ। नव संवत्सर के राजा यानी राष्ट्रपति बुध, वहीं शुक्र ग्रह सौर मंडल के मंत्री यानी प्रधानमंत्री बने। भारतीय नव संवत्सर 2080 के आगाज के साथ ही मंदिरों में ठाकुरजी को नव संवत्सर का पंचांग पढ़कर सुनाया गया। मंगला झांकी में शंख आदि की मंगल ध्वनी सुनाई दे रही है। जगह-जगह श्रद्धालुओं के तिलक कर और रक्षा सूत्र बांधकर नव विक्रमी संवत्सर की शुभकामनाएं दी जा रही है।
विक्रम संवत 2080 की शुरुआत पर बुधवार को शहरों में कई कार्यक्रम हो रहे हैं। चौराहों-गली मोहल्लों में सतरंगी रंगोली सजाने के अलावा केसरिया पताका फहराई गई है। ढोल-ढमाकों और आरती की गूंज हो रही है। व्यापारिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने लोगों को नव नवसंवत्सर की शुभकामनाएं दी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नवरात्र बुधवार से शुरू हो गए है। इस मौके पर छोटे-बड़े मंदिरों में देवी दर्शन के लिए श्रद्धालु पूजन सामग्री के साथ मंदिर पहुंचे और मूर्तियों के सामने दीप जलाकर आराधना की। नवरात्र का पहला दिन होने के कारण सुबह की आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु सुबह जल्दी ही तैयार होकर मंदिर पहुंचे। मंदिरों में मां भगवती के विविध स्वरूपों के भक्तों ने दर्शन किए।
नवरात्र पर कई घरों में नवाह्न्पारायण और रामायण पाठ तो कहीं दुर्गा सप्तशती के पाठ प्रारंभ किए गए। मंदिरों को रंग-बिरंगी लड़ियों से सजाया गया था। मंदिरों में माता रानी का फूलों से श्रृंगार किया गया है। नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शुभ मुहुर्त में घटस्थापना का दौर चला। नवरात्र को लेकर बाजार में मिट्टी के कलश, बजोरा, कुण्डे, पोषाक, चूनरी, माला-प्रसाद नारियल आदि की दुकानों पर लोग पूजा आदि की सामग्री लेने आ रहे है। अष्टमी तिथि 29 मार्च बुधवार को रात्रि 11. 31 बजे तक है, जिसमें दुर्गा अष्टमी पूजन दिन व रात्रि को किया जा सकता हैं एवं 30 मार्च गुरुवार को रामनवमी पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 10. 59 बजे तक उपरांत पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है,जो शुभाशुभ श्रेष्ठ योग है, इस समय किए गए कार्यो का विशेष शुभ फल मिलता है।
नवरात्रि स्थापना से विजया दशमी तक प्रतिदिन मंदिरों में विभिन्न धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। माता व बालाजी महाराज की विशेष झांकियां सजेंगी। माता के दरबार में नौ दिन तक शक्ति उपासना के साथ ही विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों में यजमान नित्य पूजा अर्चना व शक्ति उपासना करेंगे। नवरात्र के अवसर पर प्रदेश के बड़े मंदिरों में नौ दिन तक भक्ति की बयार बहेगी।

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