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राजस्थान: गहलोत-पायलट के संकट मोचक ने खेमा बदला, एक-दूसरे के खिलाफ मुखर हुए

by Madhurendra
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जयपुर। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी ज्यादा दिन तक नहीं रहती, इसकी एक बानगी इन दिनों राजस्थान कांग्रेस में भी है। यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत- सचिन पायलट के कट्टर समर्थक रहे नेताओं ने अब सियासी फायदे के लिए खेमे बदल लिए तो निष्ठा दिखाने के लिए एक-दूसरे कैंप के खिलाफ बयानवीर भी बने हुए हैं। इनमें कई प्रमुख नेता तो ऐसे हैं, जो पहले कभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के करीब हुआ करते थे।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद कट्टर समर्थक माने जाने वाले पूर्व मंत्री और बायतु से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी, खिलाड़ी लाल बैरवा, मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, वाजिब अली, दिव्या मदेरणा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाते थे लेकिन गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद सीएम गहलोत से नाराजगी के चलते इन नेताओं ने पाला बदलते हुए पायलट कैंप का दामन थाम लिया और अब खुलकर सचिन पायलट कैंप के साथ खड़े हैं। हरीश चौधरी और दिव्या मदेरणा हालांकि किसी कैंप में होने का दावा नहीं करते लेकिन खिलाड़ी बैरवा, राजेंद्र गुढ़ा और वाजिब अली खुलकर गहलोत सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधने से भी नहीं चूकते हैं।
हाल ही में चल रहे सियासी घटनाक्रम के दौरान भी पायलट कैंप की तरफ से राजेंद्र गुढ़ा और खिलाड़ी बैरवा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। जबकि, साल 2020 में सचिन पायलट कैंप के बगावत के चलते गहलोत सरकार पर आए सियासी संकट के दौरान राजेंद्र गुढ़ा, खिलाड़ी बैरवा, हरीश चौधरी और दिव्या मदेरणा गहलोत सरकार के साथ खड़े रहे। साथ ही, सरकार बचाने के लिए 35 दिनों तक बाड़ेबंदी में भी रहे थे। कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा भी लगातार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सरकार पर सवाल खड़े करते रहेंगे।
सचिन पायलट के कट्टर समर्थक माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विश्वस्त माने जाते हैं। प्रताप सिंह खाचरियावास ने सियासी संकट के दौरान पायलट कैंप साथ छोड़कर गहलोत कैंप को अपना लिया था, तो वहीं रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह सचिन पायलट के साथ मानेसर चले गए थे जिन्हें बाद में पार्टी आलाकमान ने मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था लेकिन उसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान रमेश मीणा और विश्वेंद्र को फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया था।
इसके बाद से ही रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी हैं जिन 92 विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थन में इस्तीफे दिए उनमें रमेश मीणा भी शामिल हैं। इसके अलावा कभी सचिन पायलट के बेहद करीबी रहे विधायक दानिश अबरार, प्रशांत बैरवा, चेतन डूडी, रोहित बोहरा भी अब गहलोत कैंप में हैं। साल 2020 में सियासी संकट के दौरान इन विधायकों ने सचिन पायलट कैंप का साथ छोड़कर गहलोत कैंप में शामिल हो गए थे और सरकार बचाने के लिए खड़े रहे थे।

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