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Patiala News: पटियाला में आखिर क्यों हिंदू और सिख संगठनों के बीच हुई हिंसा? असल वजह अब आई सामने

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पंजाब के पटियाला (Patiala) में शुक्रवार को दो गुटों के बीच जुलूस निकालने को लेकर झड़प हो गई. यह झड़प हिंदू और सिख संगठनों के बीच हुई, जिसके बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है. घटना के समय हालात इतने बेकाबू हो गए कि तलवारें लहराईं गईं और पुलिस पर पथराव किया गया. जुलूस निकालने को लेकर छिड़े इस विवाद में एक पुलिस अफसर समेत तीन लोग घायल हुए हैं. दरअसल खालिस्तानी आतंकी (सिख फॉर जस्टिस) गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannun) ने शुक्रवार को ऐलान किया था कि खालिस्तान का स्थापना दिवस मनाया जाएगा.

गुरपतवंत ने जहां हरियाणा के एसपी और डीसी कार्यालयों पर खालिस्तानी झंडे फहराने का ऐलान किया, तो वहीं दूसरी ओर एक हिंदू संगठन ने पटियाला में खालिस्तान के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ मार्च निकालने की घोषणा की. शुक्रवार दोपहर को जब हिंदू संगठन ने मार्च निकाला, तो खालिस्तान के समर्थकों (Khalistan Supporters) ने इसका जमकर विरोध किया, जिसके बाद तनाव इतना बढ़ गया कि पत्थरबाजी शुरू हो गई और तलवारें लहराईं जाने लगी. हालांकि जुलूस निकालने की इजाजत दोनों में ले किसी भी समुदाय को नहीं थी. पन्नू के खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने के ऐलान का शिवसेना बाल ठाकरे नाम के एक हिंदू संगठन ने जमकर विरोध किया था.

पुलिस को करनी पड़ी हवाई फायरिंग

पुलिस ने हालांकि इस बवाल को रोकने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन जब लोग बेकाबू हो गए, तब उन्हें हवाई फायरिंग करनी पड़ी. इस मार्च के दौरान कुछ लोगों ने “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे भी लगाए. सिख समुदाय के लोगों का इस घटना पर कहना है कि खालिस्तान के नाम पर पटियाला में बेवजह शिवसेना के द्वारा ये प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया, जिससे यहां का माहौल खराब हुआ.

आखिर क्यों भड़का सिख समुदाय के लोगों का गुस्सा?

अकाल यूथ संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि खालिस्तान (Khalistan) का कोई मुद्दा पटियाला में नहीं है और पटियाला में हिंदू और सिख भाईचारा पिछले लंबे समय से बड़े ही सौहार्द के साथ रहा है, लेकिन शिवसेना के द्वारा “खालिस्तान मुर्दाबाद” नाम का ये मार्च निकाला गया. जबकि “खालिस्तान” शब्द खालसा पंथ से भी जुड़ा है. यही वजह रही कि सिख संगठनों को इसपर ऐतराज हुआ और वो लोग शिवसेना के मार्च के खिलाफ गए. सिख संगठनों ने कहा कि अगर शिवसेना को खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके सिख फॉर जस्टिस संगठन (Sikhs for Justice) से कोई ऐतराज है तो उन्हें उसके खिलाफ प्रोटेस्ट मार्च निकालना चाहिए नाकि इस तरह से खालसा पंथ के खिलाफ माहौल बनाना चाहिए.

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