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UP: पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाने वाले कश्मीरी छात्र 6 महीने बाद जेल से रिहा, नहीं मिल रहे थे गारंटर

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के एक क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत (Pakistan Cricket Team win) का कथित तौर पर जश्न मनाने के लिए गिराफ्तार तीन कश्मीरी छात्रों (Kashmiri students) को कानूनी औपचारिकताएं पूरी किये जाने के बाद यहां की जिला जेल से रिहा कर दिया गया. इन छात्रों के खिलाफ पिछले साल राजद्रोह और साइबर आतंकवाद (cyber terrorism) के आरोप लगाए गए थे. यह जानकारी एक छात्र संघ ने मंगलवार को दी. छात्र संघ ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किए गए छात्रों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से 30 मार्च को जमानत मिल गई थी, लेकिन स्थानीय गारंटर उपलब्ध नहीं होने और पुलिस सत्यापन नहीं हो पाने जैसे कारणों से वे अभी तक जेल में बंद थे.

जम्मू कश्मीर छात्र संघ ((JKSA)) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नासिर खुहमी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सोमवार को तीनों छात्रों को रिहा कर दिया गया. उन्होंने कहा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत आदेश एक स्वागत योग्य कदम था और हम छात्रों के खिलाफ आरोपों पर व्यापक और व्यावहारिक समीक्षा करने के लिए न्यायपालिका के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए प्रधानमंत्री की विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने वाले तीन छात्रों को पिछले साल 28 अक्टूबर को एक टी-20 क्रिकेट मैच में भारत के खिलाफ जीत के बाद पाकिस्तान के खिलाड़ियों की प्रशंसा करने वाला व्हाट्सएप स्टेटस पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.



आगरा पुलिस ने दर्ज की थी प्राथमिकी

आगरा पुलिस ने तीनों छात्रों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए, 153ए और 505(1)(बी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66एफ के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. पिछले साल अदालत में सुनवाई के बाद दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने तीनों इंजीनियरिंग छात्रों का पीछा भी किया था. हालांकि, आगरा पुलिस उन्हें सुरक्षित तरीके से निकाल कर ले गई थी. खुहमी ने कहा, छात्र संघ के रूप में हमारा मकसद हमेशा छात्रों के अधिकारों और उचित हितों की रक्षा करना है, साथ ही उन्हें कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में उनके कर्तव्यों की याद दिलाना है. स्थानीय वकीलों द्वारा तीन छात्रों के मामले में पैरवी करने करने से इनकार करने के बाद, मथुरा के एक वकील मधुवन दत्त चतुर्वेदी अदालत में उनकी ओर से पेश हुए थे.

(भाषा इनपुट के साथ)

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