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ब्रिटिश पीएम जॉनसन ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

by City Headline

भारत में दो- दिवसीय दौरे पर आए ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने जहां अपना पहला दिन अहमदाबाद में गुजारा तो वहीं दूसरे दिन वह राजधानी दिल्ली में रहेंगे। इस दौरान ब्रिटिश पीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर बात की गई है। जिसमें रणनीतिक रक्षा, राजनयिक और आर्थिक साझेदारी पर भी चर्चा की गई है।

ब्रिटिश पीएम जॉनसन ने कहा कि दुनिया को निरंकुश देशों से बढ़ रहे खतरों का सामना करना पड़ रहा है जो लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं। साथ ही स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यापार को भी रोकना चाहते हैं और संप्रभुता को रौंदना चाहते हैं। भारत के साथ यूके की साझेदारी ऐसे मुश्किल दौर में मिसाल है। जलवायु परिवर्तन से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तक, हमारे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारा सहयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम भविष्य की ओर देखते हैं।’

जॉनसन और पीएम मोदी की इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य घनिष्ठ साझेदारी को मजबूत करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद बदलती विश्व व्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव को देखते हुए भारत और ब्रिटेन किस तरह से द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाएं। यह इस वार्ता का अहम हिस्सा होगा। बोरिस जॉनसन कल देर रात दिल्ली पहुंचे, जहां केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की।

आपको बता दें कि जानसन ने यह संकेत भी दिया है कि ब्रिटेन ज्यादा भारतीय पेशेवरों को अपने यहां काम करने के लिए वीजा देने को तैयार है। मोदी और जानसन ने पिछले वर्ष अपनी वर्चुअल बैठक में 2030 तक भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय रिश्तों के लिए कुछ अहम लक्ष्य तय किए थे। इसकी समीक्षा शुक्रवार को होने वाली वार्ता का अहम हिस्सा रहेगा।

दोनों देशों के बीच एक अरब ब्रिटिश पाउंड (तकरीबन 9,960 करोड़ रुपये) के निवेश सौदे होने की संभावना है। ग्रीन टेक्नोलाजी यानी पर्यावरण सुरक्षा करने वाली तकनीक में सहयोग को लेकर भी कुछ अहम घोषणाएं होंगी। ब्रिटिश पीएम ने भारत की यात्रा शुरू करने से पहले और अहमदाबाद में उतरने के बाद दो अहम संकेत दिए हैं। पहला, यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर उनका देश भारत पर दबाव बनाने की कोई कोशिश नहीं करेगा।

यहां तक कि उन्होंने कहा कि रूस-भारत के बीच ऐतिहासिक तौर पर विशेष रिश्ता है, जैसा कुछ दशक पहले तक ब्रिटेन और रूस के बीच था। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में जब भारत ने रूस के पक्ष में वोटिग से अनुपस्थित रहने का फैसला किया, तब जानसन सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने तल्खी भरी टिप्पणी की थी। यूरोप व अमेरिका के बढ़ते दबाव को देख भारत ने काफी सख्ती से अपना पक्ष रखा था कि वह स्थिर रहने की नीति पर अडिग रहेगा।

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