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सारण में लालू परिवार और राजीव प्रताप रुडी के बीच टकराव हो रहा है, जो नई बात नहीं है। इस जंग में कब-कौन पड़ा भारी…

by Nikhil

2008 में सारण नामक लोकसभा सीट की स्थापना हुई थी, जो पहले छपरा नामक लोकसभा सीट के रूप में प्रसिद्ध थी। इस सीट पर कई बार लालू यादव परिवार और भाजपा के नेता राजीव प्रताप रूडी के बीच टकराव हुआ है। अमर उजाला की विशेष चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में जानिए सारण सीट का ऐतिहासिक परिचय। लोकसभा चुनाव के प्रचार अब अपने चरम पर हैं, और आज पहले चरण का मतदान भी हो जाएगा। इस उत्सव के दौरान, कुछ सीटों पर एक रोमांचक मुकाबला हो गया है। उनमें से एक है बिहार की सारण लोकसभा सीट। इस सीट पर लालू यादव की बेटी, किस्मत, उम्मीदवारी कर रही हैं। उनके सामने भाजपा के विशाल नेता राजीव प्रताप रुडी हैं, जो इस मुकाबले में उत्साहित हैं।

बिहार से लोकसभा के 40 सांसद चुने जाते हैं, और इनमें से एक सीट सारण की भी है। इस चुनाव में सारण सीट को सुर्खियों में देखा जा रहा है। सारण नाम से लोकसभा सीट की स्थापना 2008 में हुई थी, परिसीमन से पहले यह छपरा लोकसभा चुनाव क्षेत्र था। 1951-52 में देश के पहले आम चुनाव के समय छपरा नाम से लोकसभा सीट नहीं थी।

शुरुआती चुनावों में कांग्रेस के रामशेखर जीते, जैसा कि 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में छपरा सीट को प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के राजेंद्र सिंह ने जीता। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार लीला देवी वर्मा को 2,948 वोट से हराया।

1962 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के रामशेखर प्रसाद सिंह जीते, जिन्होंने पिछले चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के राजेंद्र सिंह को 21,204 वोट से हराया। 1967 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के रामशेखर प्रसाद सिंह जीते, जिन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के एचपी यादव को 28,209 वोट से हराया। 1971 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के रामशेखर प्रसाद सिंह ने हैट्रिक किया, जिन्होंने भारतीय क्रांति दल के सत्यदेव सिंह को 39,170 वोट से हराया।

1977 के आपातकाल के बाद, देश में चुनावी माहौल में तेज़ी आती है। छपरा से निकली जनता पार्टी एक नये नेता को सामने लाती है। पटना विश्वविद्यालय के एक छात्र-नेता भारतीय लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरता है। वह न केवल मैदान में उतरता है, बल्कि जीत भी जाता है। यह जीत छोटी-मोटी नहीं है, बल्कि 3,73,800 वोटों की भारी जीत है, जिससे बिहार की राजनीति में उदय होता है लालू प्रसाद यादव का। लालू यादव का नाम बिना बिहार की राजनीति का पूरा नहीं होता है। 1977 में, 28 साल के युवा लालू ने छपरा सीट पर तीन चुनाव जीत चुके कांग्रेस के रामशेखर प्रसाद सिंह को हराया।

तीन साल बाद, 1980 में, मध्यावधि चुनावों में, जनता पार्टी टूट जाती है। जनता पार्टी के टिकट पर सत्यदेव सिंह उतरते हैं, जबकि लालू प्रसाद यादव जनता पार्टी (सेकुलर) के उम्मीदवार होते हैं। इस मुकाबले में, बड़ी टक्कर होती है, और लालू को इस बार हार मिलती है। सत्यदेव सिंह ने सिर्फ 8,781 वोटों से जीत हासिल की।

1984 में, छपरा सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार, राम बहादुर सिंह को जीत मिलती है। सहानुभूति लहर के बावजूद, कांग्रेस छपरा में जीत नहीं पाती। इस चुनाव में, कांग्रेस के प्रत्याशी भीष्म प्रसाद यादव को 26,006 वोटों से हार का सामना करना पड़ता है। 1977 में इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले लालू यादव इस बार 28.27 फीसदी वोट प्राप्त करने के बावजूद तीसरे स्थान पर आते हैं। इस चुनाव में, लालू लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरे थे।

हार के बाद, लालू यादव की वापसी 1989 के लोकसभा चुनाव में, लालू प्रसाद यादव फिर से छपरा सीट पर उतरते हैं। इस बार उनकी पार्टी अलग होती है। जनता दल के टिकट पर उतरे लालू प्रसाद यादव, लगातार दो चुनावों में हार के बाद, इस बार जीत हासिल करते हैं। लालू ने जनता पार्टी (जेपी) के उम्मीदवार, राजीव रंजन सिंह को 1,41,882 मतों से हराया।

2014 के लोकसभा चुनाव में, राजद की ओर से लालू यादव की पत्नी, राबड़ी देवी, सारण सीट पर उम्मीदवार थीं। उनके खिलाफ भाजपा के राजीव प्रताप रुडी लगातार दो चुनावों में हार चुके थे। इस चुनाव में रुडी ने वापसी की और पूर्व मुख्यमंत्री को शिकस्त दे दी। भाजपा उम्मीदवार को 3,55,120 वोट मिले जबकि राबड़ी देवी को 3,14,172 वोट मिले। इस जीत के बाद, 2014 में, रुडी नरेंद्र मोदी सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने।

2019 में, लालू के समधी को हार का सामना करना पड़ा। सारण सीट पर भाजपा ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की। भाजपा की इस जीत में सारण की जीत में शामिल रही, जहां भाजपा से राजीव प्रताप रुडी ने एक बार फिर से जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार ने इस बार राजद की तरफ से उतरे लालू यादव के समधी चंद्रिका रॉय को हरा दिया। राजीव प्रताप रुडी ने यह चुनाव 1,38,411 वोटों के बड़े अंतर से जीता।

इस बार, 2024 के चुनाव में, सारण सीट पर भाजपा ने राजीव प्रताप रुडी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, राजद की तरफ से लालू यादव की बेटी, रोहिणी आचार्य, मैदान में हैं। रोहिणी पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रही है

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