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वेबसाइट का गलत नाम टाइप करते ही हो सकते हैं यूआरएल हाइजैकिंग का शिकार, जानिए यह क्या है और कैसे बचें

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जैसे-जैसे तकनीक का दायरा बढ़ रहा है, हैकर्स (Hackers) अपने काम करने का तरीका भी बदल रहे हैं. यूजर्स की जानकारी चुराने, बैंकिंग पासवर्ड पर सेंध लगाने के लिए हैकर्स अब नया तरीका अपना रहे हैं. इसका नाम है यूआरएल हाईजैकिंग (URL Hijacking). इसे टाइपोस्क्वैटिंग (Typosquatting) के नाम से भी जाना जाता है. अगर आप भी ब्राउजर पर वेबसाइट का नाम टाइप करते समय लापरवाही बरतते हैं या शब्दों में गलती करते हैं तो यह आदत हैकर्स का काम आसान कर सकती है और आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कुछ बातों का ध्यान रखकर इस खतरे से खुद को बचाया जा सकता है.

क्या होती है यूआरएल हाइजैकिंग, कैसे हैकर्स यूजर को बनाते हैं अपना निशाना और इससे कैसे बचा जा सकता है? जानिए, इन सवालों के जवाब…

क्या है यूआरएल हाइजैकिंग या टाइपोस्क्वैटिंग?

यह एक तरह का सायबर अटैक है, जहां हैकर्स इंटरनेट यूजर्स को फर्जी वेबसाइट के चक्कर में फंसाता है. हैकर अपनी चाल में तब कामयाब होता है, जब कोई यूजर ब्राउपर पर वेबसाइट का नाम गलत टाइप कर देता है. ऐसा करते ही वो उसकी नाम वाली फेक वेबसाइट पर पहुंच जाता है.

हैकर्स कैसे बनाते हैं निशाना, 3 पॉइंट में समझें

डुप्लीकेट वेबसाइट बनाई: यूआरएल हाइजैकिंग के लिए सबसे पहले उन कॉमन वेबसाइट्स की डुप्लीकेट वेबसाइट बनाते हैं जहां यूजर्स सबसे ज्यादा जाते हैं. जैसे- ई-कॉमर्स वेबसाइट, जॉब के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट या ऐसी ही लोगों को जरूरी जानकारी देने वाली वेबसाइट.
कंफ्यूज करने वाला नाम रखा: हैकर्स डुप्लीकेट वेबसाइट का नाम रखने में हेरा-फेरा करते हैं. इसे एक उदाहरण से समझते हैं. जैसे- ई-कॉमर्स की सबसे फेमस वेबसाइट है Amazon.in. हैकर्स अपनी डुप्लीकेट वेबसाइट का नाम इससे मिलता-जुलता रखते हैं ताकि लोगों को कंफ्यूज किया जा सके. वो इसके लिए Amzon.in या Amazan.in या फिर Amezon.in रख देते हैं. ऐसे ही अलग नामों से डोमेन भी रजिस्टर करा लेते हैं.
…और इस तरह फंस जाता है यूजर: जब भी कोई यूजर अमेजन का नाम गलत टाइप करता है या ब्राउजर पर हूबहू इन्हीं शब्दों का प्रयोग करता है तो वो सीधे हैकर की फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है. यहां पर अलग-अलग तरह के लिंक पर क्लिक करने या ऑनलाइन मनी ट्रांजेक्शन के विकल्प का इस्तेमाल करने पर यूजर फंस जाता है.

इससे कैसे बच सकते हैं?

सबसे जरूरी बात है कि ब्राउजर पर वेबसाइट का नाम टाइप करते समय इस बात का ध्यान रखें कि क्या सही नाम लिखा है. ज्यादातर यूजर यहीं पर गलती करते हैं. वेबसाइट खुलने पर देखें कि कहीं ये बदली-बदली तो नहीं नजर आ रही. अगर आपको लगता है कि वेबसाइट गड़बड़ है तो बिना किसी लिंक पर क्लिक किए लौट जाएं या टैब को ही बंद कर दें.

सिर्फ गलत नाम टाइप करके ही नहीं, सोशल मीडिया के जरिए भी हैकर्स निशाना बनाते हैं. सोशल मीडिया पर बने पेजों पर कई फर्जी वेबसाइट के लिंक दिए जाते हैं और वहां पर सस्ती डील ऑफर की जाती है. यूजर लालच में उन डुप्लीकेट वेबसाइट के लिंक पर क्लिक करते हैं. इस तरह वो वहीं पहुंच जाते हैं जहां नहीं जाना चाहिए. इसलिए ऐसे लिंंक से बचें.

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