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रोहित-विराट के पास विश्व कप में 66 मैचों का अनुभव, बाकी भारतीय बल्लेबाजों ने मिलकर नहीं खेले इतने मैच

by Nikhil

भारतीय टीम के पास 11 साल से चले आ रहे आईसीसी ट्रॉफी के सूखे को खत्म करने का एक और मौका है। दारोमदार फिर बल्लेबाजों के कंधों पर है। रिकॉर्डों के आईनें में भारतीय बल्लेबाजी सभी टीमों पर भारी पड़ती नजर आती है। बल्लेबाज अपने अनुभव और पुराने रिकॉर्ड पर खरे उतरे तो भारत 2007 के बाद फिर से टी-20 विश्व कप चैंपियन बन सकता है। टी-20 विश्व कप में अनुभव और रनों के मामले में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली के कोई आसपास भी नहीं है। रोहित का यह नौवां और विराट का छठा टी-20 विश्व कप होगा। रोहित (39) और विराट (27) दोनों ने मिलकर टी-20 विश्व कप के 66 मैच खेले हैं। यह इतना बड़ा अनुभव है, जो पूरी भारतीय टीम की बल्लेबाजी के पास नहीं है। टीम के बाकी बल्लेबाजों (ऑलराउंडरों को मिलाकर) ने मिलकर भी इतने टी-20 विश्व कप के मैच नहीं खेले हैं।

विराट के नाम हैं विश्व कप में सर्वाधिक रन
2007 का विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य रोहित के नाम सभी नौ टी-20 विश्व कप खेलने का अनोखा रिकॉर्ड बनेगा। रोहित और विराट दोनों को वेस्टइंडीज में भी खेलने का अनुभव है। वहां की धीमी पिचें दोनों की बल्लेबाजी को रास आएंगी। खासतौर पर विराट की नजरें जमीं तो वह हर मैच में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। विराट ने तो टी-20 विश्व कप के 27 मैचों में 81.50 के औसत से 1141 रन बनाए हैं, जो सर्वाधिक हैं। रोहित ने भी 39 मैचों में 34.39 की औसत से 963 रन बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया में हुए टी-20 विश्व कप के बाद दोनों का इस विश्व कप में खेलना तय नहीं था, लेकिन चयनकर्ताओं ने दोनों के अनुभव को वरीयता देते हुए उन्हें एक बार फिर टीम में शामिल किया। ऐसे में ये दोनों भी जानते हैं कि उन पर बड़ी जिम्मेदारी है और दोनों इस मौके को दोनों हाथों से भुनाना चाहेंगे।

कौन करेगा ओपनिंग, विराट या यशस्वी?
विराट कोहली ने आईपीएल में 741 रन बनाकर ऑरेंज कैप हासिल की है, लेकिन वह आरसीबी के लिए बतौर ओपनर खेले हैं। यहीं पर टीम प्रबंधन को बड़ा फैसला लेना है कि रोहित के साथ विराट ओपनिंग करेंगे या फिर पहला विश्व कप खेल रहे यशस्वी जायसवाल को मौका दिया जाएगा। यशस्वी जिस अंदाज में खेलते हैं उनके ओपनिंग के अवसर ज्यादा हैं। फिर रोहित के साथ उनके ओपनिंग करने से दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाज की जोड़ी भी बनती है, जो गेंदबाजों के लिए परेशानी पैदा करेगी। विराट को ऐसे में नंबर तीन के स्थान पर उतारा जा सकता है।

सूर्यकुमार का भी मिलेगा साथ
सूर्यकुमार यादव का यह तीसरा टी-20 विश्व कप होगा। उनका नंबर चार का स्थान पक्का लग रहा है। सूर्यकुमार की मौजूदगी टीम की बल्लेबाजी को अतिरिक्त ताकत प्रदान करती है। सूर्य ने विश्व कप के 10 मैचों में 281 रन बनाए हैं। वह चले तो मैच की दशा एक झटके में बदल सकते हैं।

पंत के आने से मध्यक्रम को मिली मजबूती
भारतीय बल्लेबाजी को सबसे बड़ी राहत ऋषभ पंत के आने से मिली है। पंत मध्यक्रम को और ज्यादा मजबूत बनाते हैं। वह विकेटकीपर की भी भूमिका निभाएंगे। दूसरे विकेट कीपर पहला विश्व कप खेलने वाले संजू सैमसन हैं, लेकिन पंत पर उन्हें वरीयता मिलना मुश्किल है। पंत का यह तीसरा विश्व कप है। हालांकि बीते दो विश्व कप में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। उन्होंने सात मैचों में सिर्फ 87 रन बनाए हैं, लेकिन इस बार वह आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन करके आ रहे हैं। फिर सड़क दुर्घटना के बाद वह पहली बार टीम इंडिया के लिए खेलेंगे। वह अपने को स्थापित करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। चौथा विश्व कप खेल रहे हार्दिक पंड्या और छठा विश्व कप खेल रहे रविंद्र जडेजा जैसे ऑलराउंडर भारतीय बल्लेबाजी की गहराई को और मजबूत करते हैं।

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