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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा बोले- राहुल गांधी तो भगोड़ा घोषित हो गए, पटवारी को मातृ शक्ति देगी जवाब

by Nikhil

मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा की जीत होगी। छिंदवाड़ा सीट पर भी इस बार कमल खिलने वाला है। उन्होंने विशेष इंटरव्यू में राहुल गांधी को भगोड़ा भी कह दिया।

मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को दावा किया कि इस बार प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा की जीत होगी। छिंदवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ की भी हार होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जीतू पटवारी ने दलित महिला के बारे में जो टिप्पणी की है, वह महिला विरोधी कांग्रेस का मूल चरित्र दर्शा रही है। मातृ शक्ति जमीन पर उतर आई है और वह ही पटवारी और कांग्रेस को जवाब देगी।

भाजपा के खजुराहो से प्रत्याशी विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी पहले अमेठी से वायनाड गए। अब वहां भी हार रहे हैं तो रायबरेली में जमीन तलाश रहे हैं। वहां भी भाजपा का परचम फहराएगा। रायबरेली में भी उन्हें हार मिलेगी। वह तो पूरे देश में भगोड़ा घोषित हो गए हैं।

दो चरण का मतदान हुआ है। तीसरे दौर का मतदान सात मई को है। इस बार क्या माहौल है?
मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर के विधानसभा चुनावों में जनता के मन में मोदी थे। लोकसभा चुनावों में तो जनता ने मन बना लिया है कि नरेंद्र मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाना है। प्रदेश की 29 में से 29 सीटों पर जीत हासिल होगी। 2014 में हमारे पास 27 सीटें थी और 2019 में 28 सीटें थी। छिंदवाड़ा सीट हमारे पास नहीं थी। इस बार छिंदवाड़ा में भी कमल खिलेगा। कार्यकर्ता और जनता मैदान में ताकत के साथ जुटी है। हर बूथ पर जीतने का लक्ष्य है और हम इसे हासिल कर लेंगे।

क्या राजगढ़ में दिग्विजय सिंह के गढ़ को ढहाने में कामयाबी मिलेगी?
वहां का किला ढहा हुआ ही है। वहां तो दिग्विजय सिंह चुनाव नहीं लड़ रहे। औपचारिकता निभा रहे हैं। अपनी इज्जत बचाने का काम कर रहे हैं। जो व्यक्ति 2003 में जनता द्वारा नकारा गया हो, जिसे बंटाढार की पदवी के साथ जनता ने घर भेजा हो, उससे क्या उम्मीद करेंगे। 2003 के बाद जितने भी चुनाव हुए, उनमें दिग्विजय सिंह ने खुद कहा कि मैं जाता हूं तो जनता वोट नहीं देती है। राजगढ़ तो हमारा गढ़ है। हमारा सामान्य कार्यकर्ता वहां चुनाव जीत रहा है। इस बार दिग्विजय सिंह ईवीएम का बहाना ले रहे थे। 400 उम्मीदवारों को खड़ा करने की बात कर रहे थे। बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने की बात कर रहे थे। इस बार दिग्विजय सिंह शुरू से हार के बहाने तलाश रहे थे। इस बार हम ऐतिहासिक मतों से राजगढ़ जीतेंगे।

पहले दो चरणों में वोटिंग प्रतिशत कम रहा। ऐसा क्यों?
मैं खजुराहो से चुनाव लड़ रहा हूं। वहां भी वोटिंग प्रतिशत कम हुआ है। यह वास्तव में महत्वपूर्ण प्रश्न है। मैंने इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया है। शादियां बहुत थी। 42-43 डिग्री तापमान था। गर्मी बहुत थी। यह छोटे कारण हैं। बड़ा कारण यह है कि कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता अपने नेतृत्व से भारी निराश है। राहुल गांधी को देखकर उन्हें लगता है कि यह हमारा नेता है? मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी दलित महिला के लिए किस तरह की भाषा बोलते हैं। यह कांग्रेस की मानसिकता है। कांग्रेस के कार्यकर्ता ने वोट नहीं किया। इस कारण से बड़े स्तर पर मतदान प्रतिशत प्रभावित हुआ है। 2019 में कविता रानी कांग्रेस की प्रत्याशी थी। वह खुद वोट डालने नहीं गई हैं। यह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भारी निराशा है। यह मेरे हिसाब से बड़ा कारण है।

इमरती देवी के लिए जीतू पटवारी ने जो बोला, क्या उसे अब भाजपा भुनाने का प्रयास करेगी?
कांग्रेस का मूल कैरेक्टर ही यही है। मैं आपके सामने ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं कर सकता, जिन शब्दों का उपयोग दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और जीतू पटवारी ने किया है। यह महिला विरोधी कांग्रेस है। यह महिला को किस रूप में देखते हैं, यह इससे साफ है। जीतू पटवारी के खिलाफ मातृ शक्ति जमीन पर उतर आई है और उन्होंने तय कर लिया है कि ऐसा जवाब देंगे कि कभी इनके मुंह से महिलाओं के लिए इस तरह के शब्द नहीं निकलेंगे।

गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या विदिशा में शिवराज सिंह चौहान, इनका प्रचार भी खूब चल रहा है। इसकी जरूरत है क्या?
भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है कि केंद्र और राज्य सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं से लोग लाभान्वित हुए हैं। 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। मध्यप्रदेश में ढाई करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। महिलाओं, गरीबों, युवाओं के लिए जो मोदी जी ने काम किए हैं, उनकी वजह से तीसरी बार हमारी सरकार बनने जा रही है।

इसके बाद भी भाजपा को हिंदुत्व के मुद्दे को उठाना क्यों पड़ रहा है?
हिंदुत्व का मुद्दा, देश और समाज का मुद्दा है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा भाजपा का मुद्दा नहीं है। करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। पांच सौ सालों से इंतजार हो रहा था। किसे अच्छा नहीं लगेगा? दिग्विजय सिंह के पेट में दर्द क्यों हुआ? प्राण-प्रतिष्ठा का बहिष्कार क्यों किया? राहुल गांधी, सोनिया गांधी ने बहिष्कार क्यों किया, देश यह पूछना चाहता है। इनकी वजह से हिंदुत्व नहीं है बल्कि वह तो प्रखरता के साथ देश में है ही। राम मंदिर का मुद्दा जनता का मुद्दा है। आज हम गरीब कल्याण और विकास के मुद्दे पर चुनावों में उतरे हैं। राम का मुद्दा जनता का है। यदि सोनिया गांधी या दिग्विजय सिंह इसका अपमान करेंगे, तो जनता इसका जवाब देगी।

कांग्रेस के नेता आपकी पार्टी में शामिल क्यों हो रहे हैं? खजुराहो में तो आपके सामने कोई बचा ही नहीं है? 
कांग्रेस के नेतृत्व से उनका कार्यकर्ता और नेता निराश है कि पार्टी छोड़ रहा है। इस बात की समीक्षा पूरे देश में हो रही है। उनके प्रत्याशी निराश हो रहे हैं। इंदौर का प्रत्याशी (अक्षय कांति बम) मैदान छोड़कर भाग गया। मुझे चुनाव नहीं लड़ना। कहता है कि जनता मोदी जी के साथ है। ऐसे समय में हम भी जनता के साथ हैं। वह तो कहता है कि मैं मोदी जी के साथ जाना चाहता हूं और इस वजह से भाजपा में आ गया। उनके यहां भी कुछ अच्छे लोग हैं, जो देश और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं।

उन्हें लगता है कि मोदी जी के साथ जाना ही उचित है। इस वजह से कांग्रेस के नेतृत्व से निराशा है। किसी पर कोई दबाव नहीं है। ईडी, सीबीआई और संवैधानिक संस्थाएं अपना काम कर रही हैं। आपने भ्रष्टाचार किया है तो आप उसके दायरे में हैं। आपको और मुझे सीबीआई और ईडी गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे? मेरे यहां इंडी गठबंधन का प्रत्याशी आया। फिर बदला। दूसरा आया। कांग्रेस के आपसी झगड़े थे। उसने फॉर्म ऐसा भरा कि फॉर्म निरस्त हो गया। आरोप लगाते हैं कि अधिकारी ने दबाव में ऐसा किया। हकीकत यह है कि अधिकारी ने कहा कि हस्ताक्षर छूट गए हैं तो कहते हैं कि बाद में कर देंगे। फिर कोर्ट में भी नहीं जाते हैं। यह क्या है? इंडी गठबंधन या घमंडिया गठबंधन अवसरवादी हैं।

राहुल गांधी ने रायबरेली से नामांकन दाखिल किया है। क्या मैदान में असर होगा?
राहुल गांधी जी भगोड़ा घोषित हो चुके हैं देश में, यह कहना ठीक नहीं होगा। पहले आप वायनाड भागे थे। अब वायनाड से भी चुनाव हार रहे हैं। वहां से रायबरेली और अमेठी आ रहे हैं। जनता आपको वायनाड में भी जवाब देगी और रायबरेली में भी। अमेठी तो वह चुनाव लड़ ही नहीं सकते। उन्हें पता है कि जनता क्या करने वाली है? रायबरेली में जमीन ढूंढ रहे हैं। वहां भी जमीन खिसक गई है। वहां भी भाजपा का परचम फहराएगा।

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