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पीपीबीएल के बाद अब कोटक महिंद्रा बैंक पर आरबीआई की नज़र: इससे आपको क्या जानना चाहिए?

by Nikhil

रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले दो वर्षों में वह नियामक बैंक के उच्चस्तरीय प्रबंधन के साथ निरंतर संपर्क में रहा, ताकि बैंक अपनी आईटी संबंधित समस्याओं को हल कर सके, लेकिन उसके परिणाम प्रायः सकारात्मक नहीं थे। इस अवधि के दौरान, बैंक के डिजिटल लेन-देन में वृद्धि देखी गई, जिसमें क्रेडिट कार्ड के संबंध में लेन-देन भी शामिल थे। इसके परिणामस्वरूप, बैंक के आईटी सिस्टम पर भार का भार बढ़ गया है।

बैंकिंग क्षेत्र के नियामक, भारतीय रिजर्व बैंक, ने एक बार फिर अपना डंडा निजी क्षेत्र के बड़े बैंक पर चला दिया है। पहले पेटीएम पेमेंट्स बैंक को आरबीआई की कार्रवाई का शिकार बनाया गया था, अब कोटक महिंद्रा बैंक को यह भाग्य प्राप्त हुआ है। आरबीआई ने बैंक के ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग चैनल के माध्यम से नए ग्राहकों को जोड़ने और क्रेडिट कार्ड जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय केंद्रीय बैंक की ओर से पिछले दो वर्षों में की गई कार्रवाइयों के परिणाम स्वरूप लिया गया है। अब चलिए देखते हैं, कोटक महिंद्रा बैंक की जांच में भारतीय रिजर्व बैंक ने क्या खामियाँ पाईं और इस कार्रवाई के बाद बैंक के ग्राहकों पर कैसा असर पड़ेगा।

कोटक महिंद्रा बैंक के खिलाफ क्यों हुई नियामकीय कार्रवाई?

बुधवार को केंद्रीय बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान रिजर्व बैंक की ओर से कोटक महिंद्रा बैंक की आईटी जांच की गई। इस दौरान बैंक के तकनीकी संसाधनों में कई गड़बड़ियां मिलीं जो नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुकूल नहीं थे। इस दूर करने में बैंक लगातार असफल रहा इस कारण उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

बीते दिनों कोटक की सेवाएं ठप पड़ने से क्या है इस कार्रवाई का नाता?

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंक के पास मजबूत आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सूचना तंत्र से जुड़े जोखिम प्रबंधन का फ्रेमवर्क नहीं होने से पिछले दो वर्षों में कई बार इसकी कोर बैंकिंग और ऑनलाइन-डिजिटल बैंकिंग सेवाएं ठप पड़ गईं। हाल ही में 15 अप्रैल 2024 को भी बैंक को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। इससे बैंक के ग्राहकों को गंभीर परेशानियां झेलनी पड़ी। बैंक अपने विस्तार के साथ अपनी आईटी सिस्टम की खामियों को दूर करने में असफल रहा है।

ग्राहकों को होने वाली परेशानियों पर आरबीआई ने अपने बयान में क्या कहा?

रिजर्व बैंक ने कहा कि पिछले दो वर्षों में नियामक बैंक के उच्चस्तरीय प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क में रहा ताकि बैंक अपने आईटी से जुड़ी खामियों को दूर कर सके, पर इसके नतीजे बहुत सकारात्मक नहीं निकले। इस बीच यह भी देखा गया कि बैंक के डिजिटल लेनदेन जिसमें क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेनदेन भी शामिल हैं, में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस कारण बैंक के आईटी सिस्टम पर भी काफी भार बढ़ गया है। नियामक के अनुसार भविष्य में बैंक के सर्वर ठप ना पड़ें और ग्राहकों को गंभीर परेशानियों से ना जूझना पड़े इसे देखते हुए ही उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिजर्व बैंक के अनुसार बैंक की आईटी से जुड़ी खामियां ना केवल ग्राहकों को प्रभावित करती है बल्कि डिजिटल बैंकिंग और भुगतान तंत्र के फाइनेंशियल इकोसिस्टम को भी प्रभावित करती हैं।

आरबीआई की कार्रवाई से कोटक महिंद्रा बैंक के मौजूदा ग्राहकों पर निर्धारित प्रतिबंध का असर हो सकता है। उन्हें नए ग्राहकों को जोड़ने और नए क्रेडिट कार्ड जारी करने में कुछ समय की असुविधा हो सकती है। हालांकि, बैंक ने बयान में दावा किया है कि वह अपने मौजूदा ग्राहकों की सेवाओं को प्रभावित नहीं करेगा और उन्हें पहले की तरह ही सेवाएं उपलब्ध रखेगा।

कोटक महिंद्रा बैंक की ओर से अब क्या होगा, यह बैंक की आंखों में है। आरबीआई द्वारा प्रतिबंधित प्रक्रिया के बाद, बैंक को आरबीआई से मंजूरी प्राप्त करने के लिए व्यापक एक्सटर्नल ऑडिट करानी होगी। इस ऑडिट के परिणामों के आधार पर, आरबीआई बैंक पर लगाए गए पाबंदियों की समीक्षा करेगी और कोई नए कदम उठाने का निर्णय लेगी। यह समय ही बताएगा कि कोटक महिंद्रा बैंक की कार्रवाई में आगे क्या होगा।

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