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पीएम मोदी और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के बीच एक मुकाबला चल रहा है

by Nikhil

यह किसी चुनाव की बात नहीं, बल्कि उनकी रैलियों की संख्या की बात है। नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ने 103 रैलियां आयोजित की हैं, जबकि कांग्रेस के नेता ने मात्र 39 रैलियां की हैं। यहां नहीं चुनावी स्तर पर, बल्कि जनसमर्थन के स्तर पर भी मुकाबला है।
चुनाव की घोषणा के बाद से आठ मई तक, प्रधानमंत्री मोदी ने 103 रैलियां की हैं। इनमें से 9 मार्च में, 68 अप्रैल में, और 26 मई में हुईं। दिनभर में औसतन तीन रैलियां करते हुए, उन्होंने मार्च से अब तक क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सभी प्रमुख चैनलों और पत्र-पत्रिकाओं को 24 साक्षात्कार दिए हैं।
आम चुनाव की लड़ाई एक बार फिर देश के दो महत्वपूर्ण नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के बीच जोरों पर है। चुनाव की शुरुआत ही इस विमर्श के साथ हुई थी कि क्या पीएम मोदी तीसरी बार सरकार बनाएंगे या क्या विपक्ष का गठबंधन निकालेगा चुनौती? जीत की उम्मीद तो सभी की अपनी-अपनी थी, चाहे वह भाजपा और उसके साथियों की हो या फिर विपक्षी दलों की। ध्यान सभी का बस दोनों नेताओं पर है। जीत के लिए, वे दोनों पूरी कोशिश कर रहे हैं, मगर यह देखने लायक होगा कि किसने कितनी रैलियां आयोजित की, कितने साक्षात्कार दिए, और कितनी मेहनत की है।
चुनाव की घोषणा के बाद से आठ मई तक, प्रधानमंत्री मोदी ने 103 रैलियां की हैं। इनमें से 9 मार्च में, 68 अप्रैल में, और 26 मई में हुईं। दिनभर में औसतन तीन रैलियां करते हुए, उन्होंने मार्च से अब तक क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सभी प्रमुख चैनलों और पत्र-पत्रिकाओं को 24 साक्षात्कार दिए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने 21 रोड शो भी किए हैं और सैकड़ों मंदिरों और गुरुद्वारों के दर्शन किए हैं। प्रतिष्ठित लोगों और आम नागरिकों से मुलाकात की गई है।

वहीं, राहुल गांधी चुनावों के एलान के बाद न्याय यात्रा पर निकले, जो 17 मार्च को समाप्त हुई। 18 मार्च से 8 मई तक राहुल ने 39 जनसभाओं में भाग लिया। इनमें से मार्च में एक, अप्रैल में 29, और मई में 10 जनसभाएं शामिल हैं। यह दिलचस्प है कि कई रैलियां उन जगहों पर हुईं, जो कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाती हैं। उदाहरण के लिए, सातवें चरण की कुछ जगहों पर जहां कांग्रेस की लड़ाई नहीं थी, वहां राहुल ने चुनाव प्रचार किया। इसके अलावा, गठबंधन के साथियों के साथ प्रेस वार्ताएं भी हुईं, जिसकी जानकारी उनके आईटी सेल और सोशल मीडिया के माध्यम से उपलब्ध है। उनके आईटी सेल ने उनके शतरंज कौशल के बारे में भी बताया है। लेकिन, मुख्यमंदिर के मीडिया के साथ कोई साक्षात्कार नहीं हुआ।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब, जबकि राहुल ने भाजपा के सवालों पर साधी चुप्पी। पीएम मोदी ने 24 साक्षात्कारों में विपक्ष के उठाए गए सवालों का जवाब दिया है, जिनमें चुनावी बॉन्ड से लेकर एनडीए के सहयोगी जदएस के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना तक के आरोप शामिल हैं। पीएम ने मुस्लिमों को आरक्षण देने के आरोप पर भी जवाब दिया है और एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों का भी सामना किया है। उन्होंने संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के आरोपों के अलावा तानाशाही पर भी जवाब दिया है। वहीं, राहुल अब तक कोई साक्षात्कार नहीं दिया है। वे स्टूडियो में शूट और संपादित किए गए वीडियो जारी कर रहे हैं। उन पर स्क्रिप्टेड प्रेस कॉन्फ्रेंस के भी आरोप हैं, जहां उनके बयानों की चर्चा हो रही है।

 भाजपा बार-बार राहुल और कांग्रेस से यह प्रश्न पूछ रही है कि क्या वे मानते हैं कि संसाधनों का पहला हक मुस्लिमों का होना चाहिए, जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था। वे धन पुनर्वितरण, विरासत के आरोपों पर भी चुप हैं। साथ ही, सैम पित्रोदा की नस्लवादी टिप्पणी, प्रज्वल मामले में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कार्रवाई न करने जैसे सवालों से भी बच रहे हैं। विदेशी दौरों और वहां हुए सौदों को लेकर, राममंदिर के दर्शन न करने व दर्शन करने वालों के बहिष्कार जैसे सवालों का भी उत्तर नहीं दे रहे हैं।

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