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चुनाव परिणाम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण होते हैं, लेकिन पाकिस्तान में यह इतना अधिक चर्चा का विषय क्यों है? क्या इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक आधार है? या यह कुछ और है?

by Nikhil

देश में लोकसभा चुनाव के सभी सात चरण समाप्त हो चुके हैं और अब सिर्फ चुनावी नतीजों का इंतजार है। इन नतीजों का बेसब्री से इंतजार नहीं सिर्फ भारत में बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी है। चुनावी नतीजे जून के पहले सप्ताह में घोषित किए जाएंगे, जिससे सार्वजनिक उत्सुकता तेज हो रही है। अब यह तो कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी। एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना है, और पीएम मोदी के फिर से सत्ता में आने की संभावना भी है। यह तस्वीर पाकिस्तान में बहुत चर्चा में है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव एजाज चौधरी ने इसे चुनौती बताया है, उनका कहना है कि मोदी अपनी आक्रामक नीति को बढ़ावा देंगे। अखबार ने भी एग्जिट पोल्स की ख़बर को उजागर किया है, और विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है और इसका असर पाकिस्तान पर भी हो सकता है।

देश में लोकसभा चुनाव के सभी सात चरण समाप्त हो चुके हैं और अब सिर्फ चुनावी नतीजों का इंतजार है। इन नतीजों का बेसब्री से इंतजार नहीं सिर्फ भारत में बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी है। चुनावी नतीजे जून के पहले सप्ताह में घोषित किए जाएंगे, जिससे सार्वजनिक उत्सुकता तेज हो रही है। अब यह तो कुछ ही घंटों में स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी। एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना है, और पीएम मोदी के फिर से सत्ता में आने की संभावना भी है। यह तस्वीर पाकिस्तान में बहुत चर्चा में है। पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव एजाज चौधरी ने इसे चुनौती बताया है, उनका कहना है कि मोदी अपनी आक्रामक नीति को बढ़ावा देंगे। अखबार ने भी एग्जिट पोल्स की ख़बर को उजागर किया है, और विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है और इसका असर पाकिस्तान पर भी हो सकता है।

भारत में लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के इंतजार की चर्चा न केवल भारत में है, बल्कि पाकिस्तान में भी यह सवालों का केंद्र है। जनता और नेताओं की चाहत क्या है, यह अब हर किसी के मन में है। एग्जिट पोल्स के अनुसार, भारत में भारी बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) की जीत की संभावना है। यह स्थिति पाकिस्तान में उत्सुकता और चिंता का कारण बनी है।

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनके देश में लोग चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी चुनाव हारें। इसके अलावा, उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का समर्थन भी किया है। यह वादा करते हुए कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत उसके प्रधानमंत्री के रूप में फिर से मोदी को न चुने।

पाकिस्तान के नेताओं का मोदी के प्रति इस चिंता का कारण है कि वह भारतीय प्रधानमंत्री के खिलाफ कठोर नीतियों को अपनाने का आशंका करते हैं। भारत के हालिया आक्रमणों और हमलों ने पाकिस्तान को और भी चिंतित किया है। इसके संदर्भ में, पाकिस्तानी संसद में एक सांसद ने बताया कि विदेश मंत्री को भारत की आक्रमणकारी नीतियों का डर है।

पुलवामा और अन्य हालिया हमलों के बाद, भारत ने पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ा कार्रवाई की है। यह कदम पाकिस्तान को और भी चिंतित किया है, क्योंकि वह जानता है कि भारत की सुरक्षा नीतियां उसके खिलाफ सख्त हो सकती हैं।

इस तरह से, पाकिस्तान के नेताओं की चिंताओं में मोदी की बारही की जीत के संभावनाएं उन्हें और भी चिंतित कर रही हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर संबंध एक ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दा है, जो हमेशा से तनाव से भरा रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवादी समर्थन करके हिंसा को बढ़ावा दिया है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसका स्थिति बदल रहा है। कश्मीर में हुए मतदान में भारी वृद्धि इसका एक प्रमुख उदाहरण है। राज्य में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद, यह पहला चुनाव था, जिसमें जम्मू-कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों पर लगभग 58.46 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछले 35 सालों में, जम्मू-कश्मीर ने सर्वाधिक मतदान की रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा कि कश्मीर के लोगों ने विश्व को एक संदेश दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहते हुए कि कश्मीर के सामान्य लोग मतदान करते समय किसी को जीताने का प्रयास नहीं करते, बल्कि वे भारतीय संविधान को समर्थन देते हैं और भारत की सरकार बनाने में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार निष्पक्षता के साथ काम करती है। जब लोग देखते हैं कि कोई भी दल विश्वासयों को पारित नहीं कर रहा है, तो वे मतदान के लिए उत्साहित होते हैं। इस बार कश्मीर में मतदान में 40-40 साल के रिकॉर्ड टूट चुके हैं, जो एक बड़ा संकेत है। अब तक 2019 के मुकाबले, जम्मू-कश्मीर में क़रीब 13 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री कहते हैं कि कश्मीर ने दुनिया को एक संदेश दिया है।

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