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ओवैसी के ‘जय फिलिस्तीन’ नारे ने बहुत हलचल मचा दी है, इसे लेकर राष्ट्रपति तक बात पहुंच चुकी है। इसके परिणामस्वरूप सदस्यता खत्म हो भी सकती है।

by Nikhil

मंगलवार को संसद में सांसद पद की शपथ लेते समय, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ‘जय फिलिस्तीन’ का नारा लगाया, जिसके बाद राजनीतिक विवाद पैदा हुआ है। उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की गई है और इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हरिशंकर जैन ने भी राष्ट्रपति को इस मामले पर चिट्ठी लिखी है और ओवैसी की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने इस पर कहा, “संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, सांसद को सिर्फ शपथ की अवधि में बाध्यता है, उसके पहले और बाद कुछ नहीं हो सकता। हमने इस बात का विरोध किया है।”

जब असदुद्दीन ओवैसी से पूछा गया कि उन्होंने शपथ लेते समय फिलिस्तीन का ज़िक्र क्यों किया, तो उन्होंने बताया कि फिलिस्तीन उत्पीड़ित लोगों के संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने अपनी शपथ उर्दू में ली और इसके साथ ही तेलंगाना की प्रशंसा की और मुस्लिम समुदाय के लिए एआईएमआईएम के नारे को बुलंद किया। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तेज़ प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद सभापति ने इसे आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया।

उस समय, भाजपा नेता राधा मोहन सिंह ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि आधिकारिक तौर पर केवल शपथ या प्रतिज्ञा के अलावा किसी भी बयान का अधिकारिक रूप से नोटिस नहीं लिया जाएगा। प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने भी यह पुष्टि की कि संसदीय नियमों के अनुसार केवल शपथ और प्रतिज्ञा पर ध्यान दिया जाएगा। इस बीच, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने गृह मंत्री के कार्यालय को पत्र लिखकर ओवैसी के बयान पर असंतुष्टि जताई है और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने प्रोटेम स्पीकर से ओवैसी को फिर से शपथ लेने के लिए आग्रह किया।

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